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नोएडा: सेक्टर-150 हादसे की जांच में एसआईटी ने पिछले कई दिनों से प्राधिकरण से कोई सवाल नहीं किया

सेक्टर-150 में लापरवाही के जिस तालाब डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की जान गई उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए गठित एसआईटी की जांच और निष्कर्ष रहस्य बन गए हैं। एसआईटी ने जांच में क्या पाया और क्या कार्रवाई होगी? ये सवाल अब भी बरकार हैं। एसआईटी को 5 दिन में अपनी रिपोर्ट देनी थी। यह घोषणा 19 जनवरी को एसआईटी गठन के दौरान शासन ने की थी। एसआईटी ने कई दिन जांच भी की और दर्जनों सवालों के जवाब प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन से लिए हैं। इधर कुछ दिनों से सन्नाटा है।

एसआईटी के अध्यक्ष एडीजी जोन मेरठ भानु भास्कर हैं। इसमें बतौर सदस्य मंडलायुक्त आगरा भानु गोस्वामी, चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी अजय वर्मा शामिल हैं। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण के बोर्डरूम से अपनी जांच शुरू करने के साथ सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 स्थित ए-3 प्लाट को भी देखा था जो तालाब बना हुआ है। सड़क भी देखी थी जिस पर सड़क सुरक्षा के इंतजाम नदारद थे।
सूचना के बाद युवराज को बाहर निकालने में देर क्यों हुई इस सवाल पर अग्निशमन विभाग, पुलिस और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ से जवाब मांगे थे। सामने आने वाली खामियों पर भी सवाल और अधिकारियों की जिम्मेदारी, जवाबदेही, रिपोर्टिंग की जानकारी मांगी थी।

जेई और प्राधिकरण के सीईओ पर हुई है कार्रवाई-

हादसे में एसआईटी जांच से पहले प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ डॉ. लोकेश एम ने सड़क पर सुरक्षा इंतजाम न मिलने पर नोएडा ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की थी। अगले 19 जनवरी को दिन शासन ने सीईओ को प्राधिकरण से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया था।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )