ऐसे फंसाते थे जाल
पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी कई राज्यों के लोगों को निशाना बना चुके हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट और कॉलिंग के जरिये नौकरी तलाश रहे युवाओं का डेटा जुटाते थे। इसके आलवा सोशल मीडिया व डार्क वेब से बेरोजगार युवकों का डाटा लेते थे। इसके बाद उन्हें फोन करके विदेश में क्रू शिप में नौकरी दिलाने का लालच दिया जाता था। आकर्षक वेतन और विदेश में काम करने का सपना दिखाकर उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस और अन्य खर्चों के नाम पर एक लाख से लेकर एक लाख बीस हजार रुपये तक वसूले जाते थे। पैसा मिलने के बाद आरोपी या तो फोन उठाना बंद कर देते थे या फिर नए सिरे से रकम की मांग करते थे। ———– एक करोड़ से अधिक की ठगी पुलिस की जांच में आरोपियों के खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक की लेनदेन का पता चला है। आशंका है कि इन्होंने 100 से अधिक लोगों से ठगी की है। इन आरोपियों के खिलाफ केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इन खातों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से तीन लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, कॉलिंग डेटा की 26 शीट, 21 रजिस्टर, चार मोहर, चार फर्जी जॉइनिंग लेटर और कई बैंक दस्तावेज मिले हैं। पुलिस इस गिरोह के नेटवर्क का पता लगा रही है। पुलिस उन सोर्स के बारे में पता लगा रही है जहां से ये लोग डाटा लेते थे महीने का 50 हजार था किराया पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि आरोपियों का संगठित गिरोह है। इन्होंने 50 हजार रुपये प्रति माह किराये पर बिल्डिंग का हिस्सा लिया था। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट व अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हैं।

