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पश्चिमी विक्षोभ के कारण पूर्वी भारत में भी बारिश से हुए नुकसान

Western disturbances are causing rain damage even in eastern India

मौसम की अनिश्चितता से महुआ फूलों की फसल प्रभावित, पंजाब की गेहूं फसल हुई बर्बाद

झारखंड में गर्मी के आगमन के साथ ही मार्च के अंत तक महुआ के फूल खिलने लगते हैं। यह समय फूलों को इकट्ठा कर सुखाने के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि गर्म और शुष्क मौसम फूलों के सुखाने में मदद करता है। लेकिन मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में हुई बारिश और तुषारावृष्टि ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया है।

झारखंड के लातेहार जिले के किसान कुलदीप मिंज ने बताया, “इस बार बारिश के कारण बहुत से फूल सड़ने लगे, जो जमीन पर सुखाने के लिए रखे गए थे।” परंपरागत रूप से महुआ के फूल पेड़ों से नहीं तोड़े जाते, बल्कि जमीन से इकट्ठा कर तीन दिन तक धूप में सुखाए जाते हैं ताकि वे ठीक से संरक्षित रह सकें। यदि फूल ठीक से सुखाए नहीं जाते, तो वे चिपचिपे हो जाते हैं और सड़ जाते हैं।

उत्तर भारत के पंजाब में किसान गेहूं की अच्छी उपज की उम्मीद कर रहे थे। श्री मुक्तसर साहिब जिले के कोटली गांव के किसान जगमीत सिंह ने बताया, “इस वर्ष फसल की गुणवत्ता उत्कृष्ट थी। हमने पहले 1,000 से 1,500 रुपए प्रति एकड़ की दर से कीटनाशक दवाएं छिड़कनी पड़ती थीं।” परंतु 4 अप्रैल को हुई एक सुदूर तुषारावृष्टि ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया।

लगभग 35-40 मिनट तक चली तुषारावृष्टि से लगभग 80% फसल को क्षति पहुंची। यह नुकसान गेहूं उत्पादन में बड़ा झटका माना जा रहा है।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ इस बार पूर्वी भारत तक अपनी प्रभाव सीमा बढ़ा रहा है, जिससे सामान्य मौसम चक्र प्रभावित हो रहे हैं। यह विक्षोभ पश्चिमी विक्षोभ के रूप में जाना जाता है और फरवरी से मई तक भारत के विभिन्न हिस्सों में असामान्य हवा और बारिश का कारण बनता है।

इस स्थिति के कारण किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खेती ही मुख्य आधार है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि ऐसे मौसमीय बदलावों के प्रति सजग रहते हुए किसानों को नई कृषि तकनीकों और बीमा योजनाओं की ओर आकर्षित करना आवश्यक है ताकि वे अनुकूल मौसम आते ही अपनी तैयारियों को दुरुस्त कर सकें।

इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियों के कारण सामान्य मौसम चक्र में गड़बड़ी आई है, जिसने न केवल पंजाब बल्कि पूर्वी भारत के राज्यों में भी फसल नुकसान पहुँचाया है। बेहतर पूर्वानुमान और कृषि सहायता से ही इस चुनौती से निपटा जा सकता है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)