• Sun. Apr 19th, 2026

‘स्लीवलेस कुर्ती’ पर रोक? डीयू छात्रा ने कहा कि उसे एसआरसीसी ‘नारी शक्ति’ कार्यक्रम में मंत्री का सम्मान करने से रोका गया

Byadmin

Apr 17, 2026
‘Sleeveless kurti’ barred? DU student claims she was stopped from felicitating minister at SRCC 'Nari Shakti' event

“स्लीवलेस कुर्ती” पहनने पर डीयू छात्रा को मंत्री के सम्‍मान से रोका गया

दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि उन्हें एसआरसीसी में महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े ‘‘नारी शक्ति’’ कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया का सम्मान करने से उनकी स्लीवलेस कुर्ती पहनने के कारण रोका गया। घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की पहनावे और चुनाव को लेकर सामाजिक प्रतिबंधों पर सवाल उठा दिए हैं।

आधिकारिक तौर पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रा को एक मॉक संसद में भाग लेने के लिए निमंत्रित किया गया था। लेकिन, कथित तौर पर एक रिहर्सल के दौरान उन्हें उनसे हटाकर उनकी जगह किसी और को चयनित कर दिया गया। छात्रा ने इसे भेदभावपूर्ण व्यवहार करार देते हुए कहा कि महिलाओं की व्यक्तिगत आजादी और चुनाव को लेकर लगातार पाबंदियां लगाई जा रही हैं।

यह मामला न केवल विश्वविद्यालय के माहौल में महिलाओं के अधिकारों पर प्रभाव डालता है, बल्कि व्यापक तौर पर सामाजिक सांस्कृतिक मानदंडों की पड़ताल करता है। छात्रा का कहना है कि बिना किसी आधार के उनकी स्लीवलेस कुर्ती को कारण बनाकर उन्हें कार्यक्रम से दूर किया गया और यह पूरी घटना लैंगिक असमानता तथा स्वतंत्रता के खिलाफ है।

एसआरसीसी द्वारा अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि छात्रा ने सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। इस घटना ने फिर से यह चर्चा गहन कर दी है कि महिलाओं के पहनावे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर समाज में किस हद तक सीमाएं मौजूद हैं।

यह विवाद महिलाओं के पहनावे पर लगाम कसने वाले सामाजिक दुष्चक्र को उजागर करता है, जहां व्यक्तिगत पसंद को सार्वजनिक स्थानों पर भी नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। कई विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को लैंगिक समानता की दिशा में एक चुनौती मान रहे हैं, जो युवाओं में न्याय और अधिकारों की जागरूकता को और मजबूत करेगा।

अंततः यह मामला दर्शाता है कि महिलाओं के लिए उनके कपड़ों और अभिव्यक्ति के अधिकार को सुनिश्चित करना अब भी एक ज्वलंत मुद्दा है, जिसके लिए सामाजिक, नैतिक और कानूनी पहल आवश्यक हैं। महिलाओं की आज़ादी को सीमित करने वाले ऐसे कदमों के खिलाफ निरंतर सतर्कता और संवेदनशीलता की आवश्यकता है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)