11 हजार करोड़ से अधिक के बजट से नोएडा को पीछे छोड़ने वाला यमुना प्राधिकरण 25 वर्षों से कागजों में बुलंदी छू रहा है।
औद्योगिक व आवासीय जमीन की मांग बढ़ रही है, ग्रुप हाउसिंग परियोजना में कुछ साल पहले लाखों की कीमत में मिलने वाले फ्लैट अब कराेड़ों में पहुंच गए हैं, लेकिन शहर के नाम पर यीडा में आज भी अगर कुछ है तो वीरान पड़ी सड़कें, सेक्टरोंं में उगी झाड़ियां, न स्कूल और न प्यास बुझाने के लिए पानी।
बाजार, इंटरनेट, परिवहन सुविधा की बात यीडा सिटी में किसी सपने से कम नहीं है। लाखों रुपये से आशियाने बनाकर लोगों ने उन्हें वीरान छोड़ दिया है।
प्राधिकरण की आवंटन दर साल दर साल बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर शून्य है। एक ओर जापानी, सिंंगापुर सिटी बसाने के दावे हो रहे हैं, दूसरी ओर वीरान पड़े सेक्टर विकास की हकीकत से पर्दा उठा रहे हैं।
प्राधिकरण ने इन वर्षों के दौरान भूखंड योजना निकालकर अपना खजाना भरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, लेकिन शहर के लिए जरूरी सुविधाओं को विकसित करने, उन्हें आवंटियों को उपलब्ध कराने की पूरी तरह से अनदेखी की है। नतीजतन आज भी प्राधिकरण के सेक्टर में किसी भी मकान में चहल पहल नहीं है।
पानी, परिवहन सेवा तक नहीं
यीडा ने सेक्टरों में पानी की मांग पूरी करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर पानी की टंकी बना दी, लेकिन आज तक इन्हें चालू नहीं किया। सेक्टर में अगर किसी आवंटी को मकान बनाना है तो उसे टैंकर से पानी खरीदना या सबमर्सिबल करना मजबूरी है। यीडा के सेक्टरों में परिवहन सेवा शून्य है।