राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका राहुल गांधी के उस बयान के संदर्भ में दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस न केवल भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से लड़ रही है, बल्कि भारतीय राज्य से भी मुकाबला कर रही है।
शीर्ष न्यायाधीश विक्रम डी. चौहान की बेंच ने यह आदेश हिंदुत्व संगठन हिंदू शक्ति दल के एक पदाधिकारी सिमरन गुप्ता की याचिका पर सुनाया। इससे पहले, उत्तर प्रदेश के सांभल जिले की एक अदालत ने नवंबर में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका खारिज कर दी थी।
यह याचिका कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में राहुल गांधी के १५ जनवरी २०२५ के बयान के बाद दायर की गई थी। राहुल गांधी ने कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा और उसकी वैचारिक संस्था आरएसएस के साथ पारदर्शी मुकाबला नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर आप सोचते हैं कि हम भाजपा और आरएसएस नामक राजनीतिक संगठनों के खिलाफ लड़ रहे हैं, तो वे हमारे देश के लगभग हर संस्थान पर कब्जा कर चुके हैं। हम अब न केवल भाजपा और आरएसएस बल्कि भारतीय राज्य के खिलाफ भी लड़ रहे हैं।”
याचिकाकर्ता का दावा था कि राहुल गांधी के इस बयान ने देशभर के लोगों की भावनाओं को आहत किया है और इससे सांप्रदायिक तथा सामाजिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अदालत ने इस याचिका को असंगत व राजनीतिक बयान के रूप में निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
यह मामला राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के बीच जारी तीव्र संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत का यह निर्णय निकट भविष्य में इसी तरह के मामलों पर मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।