रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डियर पार्क का मिनी जू का दर्जा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण पहले ही रद्द कर चुका है और 2021 में इसका लाइसेंस समाप्त हो गया था। ऐसे में बिना वैध मान्यता के बड़ी संख्या में वन्यजीवों को रखना कानूनी रूप से भी उचित नहीं माना गया।सीईसी ने स्थानांतरण के लिए राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का निरीक्षण भी किया है, जिन्हें संभावित पुनर्वास स्थलों के रूप में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार और मानवीय तरीके से की जानी चाहिए।इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत निर्देशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करेगी। यह फैसला एक बार फिर इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि वन्यजीवों का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास में ही सबसे प्रभावी और टिकाऊ तरीके से संभव है। बढ़ती आबादी और प्रबंधन की कमी बनी वजह
अदालत ने 26 नवंबर 2025 को सीईसी को डियर पार्क का विस्तृत सर्वे करने का निर्देश दिया था। 6 मार्च 2026 को सौंपी गई रिपोर्ट में पार्क की वहन क्षमता (इकोलॉजिकल कैपेसिटी) यानी किसी क्षेत्र में सीमित संसाधनों के आधार पर कितने जीव सुरक्षित रह सकते हैं, का आकलन किया गया।रिपोर्ट में पाया गया कि हिरणों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ गई है, क्योंकि जन्म नियंत्रण और नसबंदी जैसे उपाय प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए। इसके अलावा चारे की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सुविधाओं और बाड़ों की स्थिति भी पर्याप्त नहीं पाई गई।

