डीपीए की ओर से इस संबंध में मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि 8 मई को इस मामले की दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। ऐसे में उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि अदालत में अभिभावकों और बच्चों के हितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। मालूम हो कि न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह समिति का गठन निजी स्कूलों द्वारा अतिरिक्त फीस वसूली की जांच के लिए किया गया था।
2016 में लगभग 531 विद्यालयों की सूची सार्वजनिक हुई थी, लेकिन समिति का कार्य अप्रैल 2020 तक था, इस कारण से एसोसिएशन को आशंका है कि यह सूची अंतिम नहीं है। डीपीए ने कहा कि लगभग 230 स्कूलों ने समिति की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी, जबकि करीब 300 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने रिपोर्ट को चुनौती नहीं दी और संभवत: आज भी रिफंड के लिए उत्तरदायी हैं। एसोसिएशन के अनुसार कुछ स्कूल ऐसे हो सकते हैं जो न सार्वजनिक सूची में हैं और न ही कोर्ट चुनौती सूची में, जिससे पूरे मामले में गंभीर अस्पष्टता बनी हुई है। एसोसिएशन ने सरकार से अप्रैल 2020 तक समिति के अंतर्गत आए सभी स्कूलों की अंतिम सूची सार्वजनिक करने, स्कूल वार रिफंड और ब्याज देनदारी बताने, ऑनलाइन रिफंड क्लेम पोर्टल बनाने की मांग की है।

