मुख्यमंत्री कहा कि सेंट्रल रिज राजधानी के बीचोंबीच स्थित है और इसे दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में जाना जाता है। ये इलाका हवा की गुणवत्ता सुधारने, भूजल स्तर बनाए रखने और शहरी प्रदूषण के असर को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। रिज दरअसल प्राचीन अरावली पर्वतमाला का ही विस्तार है, जो प्राकृतिक रूप से शहर को संतुलित रखने में मदद करता है। केवल देसी और पर्यावरण के अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे
सरकार ने ये भी साफ किया है कि आरक्षित वन घोषित किए गए क्षेत्रों में जहां भी खाली और उपयुक्त जमीन उपलब्ध होगी, वहां बड़े पैमाने पर देसी और पर्यावरण के अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे। इनमें नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम जैसे फलदार पेड़ भी शामिल होंगे। इस पहल का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे इलाके की पारिस्थितिकी को मजबूत करना है। लंबे समय से लंबित थी ये प्रक्रिया
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह प्रक्रिया काफी समय से लंबित थी। वर्ष 1994 में दिल्ली के सभी पांच रिज क्षेत्रों को भारतीय वन अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचित किया गया था, लेकिन उन्हें अंतिम कानूनी संरक्षण नहीं मिल पाया था। अब सेंट्रल रिज को आरक्षित वन घोषित करने के साथ यह लंबा इंतजार खत्म हुआ है। इससे पहले 4080.82 हेक्टेयर क्षेत्र रिजर्व घोषित
इससे पहले पिछले साल 24 अक्टूबर को दक्षिणी रिज के करीब 4080.82 हेक्टेयर क्षेत्र को भी आरक्षित वन घोषित किया गया था। सेंट्रल रिज की नई अधिसूचना के बाद अब तक कुल 4754.14 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को यह दर्जा मिल चुका है। सरकार का कहना है कि बाकी रिज क्षेत्रों को भी जल्द ही इसी तरह आरक्षित वन घोषित किया जाएगा और इसके लिए प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

