विदर्भ में जल संरक्षण के लिए जन आंदोलन आवश्यक: नितिन गडकरी
नागपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विदर्भ क्षेत्र को ‘‘किसान आत्महत्या क्षेत्र’’ के कलंक से बचाने तथा वहां समृद्धि लाने के लिए जल संरक्षण को जन आंदोलन के रूप में बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया है। यह बात उन्होंने पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था की रजत जयंती, जल संवाद और जल क्रांति के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही, जो 17 और 18 मई को नागपुर में मनाया जाएगा।
गडकरी ने कहा कि भारत जल की कमी से ग्रस्त नहीं है, बल्कि जल संसाधनों के उचित प्रबंधन और नियोजन में कमी है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग से जल प्रबंधन संभव है, जो देश में जल संरक्षण को मजबूती देगा।
मंत्री ने उल्लेख किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान कृषि तालाबों से निकाली गयी मिट्टी का उपयोग पश्चिमी विदर्भ के अकोला, वाशिम और बुलढाणा जिलों में भूजल स्तर बढ़ाने में सहायक रहा है। इससे किसानों ने अपनी फसल प्रणाली में आवश्यक बदलाव किए हैं, जिससे क्षेत्र में जल संरक्षण को बल मिला है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की सक्रिय भागीदारी भी अनिवार्य है। इसी कारण जल संरक्षण को व्यापक जन आंदोलन के रूप में विकसित करना आवश्यक है।
गडकरी ने बताया कि वरुद-मोरशी और कटोल-नारखेड़ के जलसंकट से ग्रस्त ‘‘डार्क जोन’’ क्षेत्र में नदियों और नालों को गहरा करने की परियोजनाएं जनभागीदारी से चल रही हैं। उन्होंने स्थानीय स्वशासन निकायों से जल संरक्षण पहलों में सक्रिय सहयोग की अपील की।
पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था अब तक 25 वर्ष से जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर काम कर रही है। इसकी विकसित ‘‘तमसवाद मॉडल’’ को देशभर में मान्यता मिली है।
संस्था की रजत जयंती के उपलक्ष्य में नागपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होंगे। पहले दिन 17 मई को ‘‘नागपुर जलसंवाद-2026’’ और दूसरे दिन 18 मई को ‘‘जलक्रांति सम्मेलन’’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के विशिष्ट जल विशेषज्ञ, पद्म पुरस्कार विजेता और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां हिस्सा लेंगी।