• Mon. May 11th, 2026

दिल्ली: अनाथ युवाओं के लिए आफ्टरकेयर स्कीम को मंजूरी

चाइल्ड केयर संस्थानों से 18 साल की उम्र के बाद बाहर आने वाले अनाथ और जरूरतमंद युवाओं की देखभाल के लिए दिल्ली सरकार ने ‘आफ्टरकेयर स्कीम’ को मंजूरी दे दी है। सरकार की इसके जरिए ऐसे युवाओं को पढ़ाई, नौकरी और आर्थिक मदद देकर आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। मातृ दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन युवाओं को स्नेह भरा तोहफा दिया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को संस्थागत देखभाल छोड़ने वाले युवाओं के लिए आफ्टरकेयर स्कीम फॉर यंग पर्सन्स की घोषणा की। इस योजना का मकसद उन युवाओं को सहारा देना है, जो 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद चाइल्ड केयर संस्थानों से बाहर निकलते हैं और जीवन की नई चुनौतियों का सामना करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बच्चों को संरक्षण देना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा भविष्य देना है, जहां वे खुद को सुरक्षित और सक्षम महसूस करें। उन्होंने कहा, कोई भी बच्चा बालिग होने के बाद खुद को अकेला न समझे, सरकार उसका साथ नहीं छोड़ेगी।

इसके लिए 3.5 करोड़ अतिरिक्त बजट
इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 3.5 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसके तहत जरूरत के हिसाब से युवाओं की पहचान की जाएगी और उनके लिए अलग-अलग प्लान तैयार किए जाएंगे, ताकि उन्हें सही समय पर सही मदद मिल सके। मुख्यमंत्री ने मातृ दिवस पर लाजपत नगर स्थित विलेज कॉटेज होम का दौरा भी किया और बच्चों से मुलाकात की। यहां उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनका हाल जाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

हजारों बच्चों को जीवन की दिशा मिलेगी
दिल्ली में इस समय 88 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस (सीसीआई) चल रहे हैं, जिन्हें सरकार और गैर-सरकारी संस्थाएं मिलकर संचालित करती हैं। इन संस्थानों में 18 साल तक के बच्चों को रहने, पढ़ाई, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा दो आफ्टरकेयर होम भी हैं। एक लड़कों और एक लड़कियों के लिए है, जहां 18 साल से ऊपर के युवाओं को सीमित समय के लिए सहारा दिया जाता है। सरकार के मिताबिक हर साल करीब 150 से 200 युवा 18 साल की उम्र के बाद इन संस्थानों से बाहर आते हैं। संस्थान के अंदर उन्हें काफी मदद मिलती है, लेकिन बाहर निकलने के बाद पढ़ाई जारी रखना, नौकरी ढूंढना, रहने की व्यवस्था करना और आर्थिक समस्याओं से जूझना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार उन्हें परिवार का सहारा भी नहीं मिल पाता। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए ये नई योजना तैयार की गई है। इसके तहत युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जाएगी, ताकि वे कॉलेज या अन्य पढ़ाई जारी रख सकें। साथ ही स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।

स्किल और रोजगार देने की तैयारी
योजना में इंटर्नशिप और नौकरी के अवसरों से जोड़ने पर भी खास जोर रहेगा। आर्थिक मदद के रूप में मासिक स्टाइपेंड देने का प्रावधान किया गया है, जिससे शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। इसके अलावा काउंसलिंग, मेंटरिंग, करियर गाइडेंस और भावनात्मक सहयोग भी दिया जाएगा, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। जरूरत पड़ने पर युवाओं को इमरजेंसी सहायता और केस-आधारित मदद भी मिलेगी। सरकार का कहना है कि हर युवा की स्थिति अलग होती है, इसलिए योजना को लचीला रखा गया है ताकि जरूरत के हिसाब से सहायता दी जा सके।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )