थैलेसीमिया से बचाव के लिए गर्भधारण से पहले स्क्रीनिंग जरूरी: विशेषज्ञ
विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने थैलेसीमिया स्क्रीनिंग और हेमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस परीक्षण के महत्व को रेखांकित किया है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर आनुवंशिक परामर्श को भी प्रजनन योजना और गर्भधारण की तैयारी में अनिवार्य करार दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल कई दंपतियां प्रजनन उपचार और आईवीएफ के माध्यम से संतान प्राप्ति कराते हैं, लेकिन आनुवंशिक बीमारियों के बारे में जागरूकता कम है। समय पर स्क्रीनिंग, परामर्श और उन्नत प्रजनन तकनीकों से दंपति आनुवंशिक जोखिमों को समझकर स्वस्थ गर्भधारण सुनिश्चित कर सकते हैं।
थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर स्वस्थ हेमोग्लोबिन का निर्माण करने में असमर्थ रहता है, जिसके परिणामस्वरूप लाल रक्त कोशिकाओं की कमी और एनीमिया हो जाता है।
यह मुख्यतः तब होता है जब दोनों माता-पिता के पास दोषपूर्ण थैलेसीमिया जीन होता है और वे इसे बच्चे को देते हैं। इसके लक्षणों में कमजोरी, थकावट, कमजोर त्वचा, विकास में देरी, साँस फूलना, बार-बार संक्रमण और प्लीहा का बढ़ना शामिल हैं। यदि थैलेसीमिया मेजर जैसे गंभीर रूपों का उचित इलाज न हो, तो यह हड्डियों के विकार, हृदय रोग, यकृत की क्षति, लोहा अधिक मात्रा में जमा होना और जीवन भर खून चढ़ाने की आवश्यकता जैसे जटिलताओं का कारण बन सकता है। कई आनुवंशिक बीमारियां, जिनमें थैलेसीमिया और अन्य रक्त विकार शामिल हैं, कैरियर्स में लक्षण नहीं दिखातीं, जिससे दंपतियों को गर्भावस्था या बच्चे के जन्म के बाद तक जानकारी नहीं होती। इसलिए, गर्भधारण से पहले रक्त परीक्षण और आनुवंशिक मूल्यांकन जोखिमों की पहचान कर सुरक्षित प्रजनन विकल्पों की योजना बनाने में मदद करते हैं,” कहा डॉ. सुरभि सिद्धार्थ, कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिशियन और गायनाकोलॉजिस्ट, मदरहुड अस्पताल, खरघर, नवी मुंबई।
डॉ. सुरभि ने आगे कहा, “कई महिलाएं बिना कैरियर स्क्रीनिंग की जागरूकता के गर्भावस्था देखभाल के लिए आती हैं और कभी-कभी पुनः गर्भपात या जटिलताओं के बाद ही इस बीमारी का पता चलता है। थैलेसीमिया जैसी स्थितियां जीवन भर खून चढ़ाने, विकास बाधित होने, कमजोरी, अंगों की क्षति एवं भावनात्मक व आर्थिक तनाव के कारण बनती हैं। इसलिए गर्भधारण से पहले परामर्श और आनुवंशिक परीक्षण अत्यंत आवश्यक हो गए हैं। सरल स्क्रीनिंग दंपतियों को जोखिम समझने और स्वस्थ भविष्य की योजना में सहायता करती है।”
डॉ. रीता मोदी, सीनियर आईवीएफ कंसल्टेंट, मदरहुड फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, खरघर, नवी मुंबई ने कहा, “कई दंपती सफल गर्भधारण की आशा से प्रजनन उपचार प्राप्त करते हैं, लेकिन कम ही लोग गर्भधारण से पहले आनुवंशिक परामर्श के महत्व को समझते हैं। नियमित थैलेसीमिया कैरियर स्क्रीनिंग सरल, सुलभ और अपेक्षाकृत कम लागत वाली होती है। विशेषकर एंडेमिक क्षेत्रों के दंपतियों, लगातार एनीमिया वाले व्यक्तियों और आईवीएफ उपचार ले रहे कपल्स के लिए परीक्षण अनिवार्य है। चिंता की बात यह है कि कैरियर्स सामान्यतः पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते हैं और उनके कोई लक्षण नहीं होते। हम कैरियर स्थिति की पहचान हेतु एचपीएलसी / हेमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस परीक्षण करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर आनुवंशिक परामर्श दंपतियों को जोखिम समझने, परिवारिक इतिहास के आधार पर मूल्यांकन करने और निर्णय लेने में सहायता करता है। आज की उन्नत प्रजनन तकनीकें न केवल गर्भधारण में मदद करती हैं बल्कि गंभीर अनुवांशिक बीमारियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचने से रोकने में भी कारगर हैं।”
कैरियर स्क्रीनिंग, पूर्वगर्भकालीन निदान और आईवीएफ के दौरान भ्रूण का आनुवंशिक परीक्षण जैसी तकनीकों के माध्यम से दंपति अपने प्रजनन विकल्पों को बेहतर समझ सकते हैं। दुर्भाग्य से कई लोग गर्भपात या जटिलताओं का सामना करने के बाद ही आनुवंशिक जांच कराते हैं। प्रीमैटल एवं प्रीकांसेप्शन स्क्रीनिंग के प्रति जागरूकता विशेषकर उच्च जोखिम वाले समूहों में अत्यंत आवश्यक है। सही समय पर किया गया सरल परीक्षण आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ा बदलाव ला सकता है।