इस बार पीडब्ल्यू

डी का रुख पहले से कहीं अधिक कड़ा है। बीते दिनों जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन सभी 448 जलभराव वाले बिंदुओं के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार अधिकारी और समीक्षा अधिकारी तैनात किए गए हैं। आदेश में बताया गया है कि नामित अधिकारियों को मानसून 2026 के दौरान जलभराव रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया गया है। यदि उनके आवंटित क्षेत्र में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली को तीन मुख्य जोन ईस्ट, साउथ और नॉर्थ में विभाजित किया गया है। विभाग की ओर से प्रत्येक जाेन के लिए विस्तृत एनेक्सर जारी किए गए हैं, जिनमें सड़क का नाम, सटीक स्थान, संबंधित डिवीजन, और वहां तैनात कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) के नाम व मोबाइल नंबर दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने इस बार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय विधायकों के साथ भी समन्वय बिठाने की कोशिश की है।
हर पॉइंट पर ट्रिपल लेयर निगरानी
विभाग ने इस बार प्रत्येक जलभराव वाले स्थानों के लिए तीन-तीन अधिकारियों की तैनाती की है। इसमें कार्यकारी अभियंता (ईई), सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) शामिल है। ऐसा इसलिए किया गया है कि अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई विवाद नहीं हो। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि जब अधिकार क्षेत्र को लेकर कई विभागों में तालमेल का अभाव रहा है। विभागीय आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारी अपने आवंटित पॉइंट की निगरानी, जलनिकासी व्यवस्था और आपात प्रतिक्रिया के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे फील्ड स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।