बोरिवली अस्पताल में चौथी पीढ़ी की न्यूनतम आघातकारी बुनियन सर्जरी से नए युग की शुरुआत
मुंबई के बोरिवली स्थित एपेक्स अस्पताल में ऑर्थोपेडिक नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है, जहाँ चौथी पीढ़ी की न्यूनतम आघातकारी हॉलेक्स वेल्गस सुधार सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। यह अत्याधुनिक उपचार विकल्प उन रोगियों के लिए एक नया आसरा है जो पीड़ादायक बुनियन विकृतियों से पीड़ित हैं। इस नवीन तकनीक के तहत दर्द में कमी, तेज़ रिकवरी, न्यूनतम निशान, और चलने-फिरने में शीघ्रता जैसी सुविधाएँ पारंपरिक सर्जरी की तुलना में उपलब्ध कराई जाती हैं।
इस सर्जरी को एपेक्स अस्पताल, बोरिवली में ऑर्थोपेडिक फुट एवं एंकल विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक विश्वविद्या द्वारा आधुनिक META तकनीक के साथ सफलतापूर्वक किया गया। META यानि मिनिमली-इनवेसिव एक्स्ट्रा-आर्टिकुलर ट्रांसवर्स मेटाटार्सल और अकिन ऑस्टियोटॉमी का इस्तेमाल करते हुए, एक विशेष उच्च सटीकता वाले बुर प्रणाली के माध्यम से यह प्रक्रिया संपन्न हुई। पारंपरिक बुनियन सुधार सर्जरी के विपरीत, जिसमें बड़े चीरे और व्यापक ऊतक कटाव की आवश्यकता होती है, यह तकनीक कई छोटे चीरों द्वारा की जाती है जिससे ऊतक क्षति और शल्योपचार के बाद की पीड़ा में भारी कमी आती है।
डॉ. प्रतीक विश्वविद्या ने कहा, “न्यूनतम आघातकारी फुट और एंकल सर्जरी ऑर्थोपेडिक देखभाल के भविष्य को बदल रही है। META ऑस्टियोटॉमी जैसी उन्नत प्रक्रियाएँ हमें जटिल बुनियन विकृतियों को सुधारने के साथ-साथ आसपास के नरम ऊतकों को संरक्षित रखने की सुविधा प्रदान करती हैं। मरीजों को अपेक्षाकृत कम दर्द, न्यून रक्तस्राव, तेज पुनर्वास, और जल्दी दैनिक गतिविधियों में लौटने का लाभ मिलता है। यह दृष्टिकोण विश्वव्यापी पैथेंट-फ्रेंडली ऑर्थोपेडिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो चिकित्सा उत्कृष्टता और पुनर्प्राप्ति गुणवत्ता दोनों को प्राथमिकता देता है।”
हॉलेक्स वेल्गस, जिसे आमतौर पर बुनियन विकृति कहा जाता है, एक प्रगतिशील स्थिति है जो बड़े पैर के अंगुष्ठ के जोड़ को प्रभावित करती है। यह अक्सर दीर्घकालिक दर्द, जूते पहनने में कठिनाई, सौंदर्य संबंधी विकृति, चलने में असंतुलन, और गतिशीलता सीमित होने का कारण बनती है। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि इसे समय पर इलाज न मिले तो यह विकृति धीरे-धीरे बिगड़ती रहती है, जिससे चलने की गति और जीवन की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
दुनियाभर के अध्ययन दर्शाते हैं कि 18 से 65 वर्ष की उम्र के लगभग एक चौथाई वयस्कों को बुनियन विकृति से प्रभावित किया जाता है, जिसमें महिलाओं और वृद्धों में इसका प्रचलन अधिक पाया गया। न्यूनतम आघातकारी ऑर्थोपेडिक प्रक्रियाओं के लिए बढ़ती झुकाव इस बात का संकेत है कि मरीज कम अस्पताल में भर्ती होने की अवधि, बेहतर सौंदर्य परिणाम, और तेज़ पुनर्प्राप्ति के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं।
चौथी पीढ़ी की इस न्यूनतम आघातकारी तकनीक के सफलतापूर्वक अपनाने से बोरिवली के एपेक्स अस्पताल की क्षेत्रीय ऑर्थोपेडिक्स और फुट एवं एंकल देखभाल के क्षेत्र में प्रतिष्ठा और भी सुदृढ़ हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के नवाचार आधुनिक ऑर्थोपेडिक्स में दीर्घकालिक कार्यात्मक परिणामों, रोगी आराम, और पुनर्वास मानकों को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।