तमिलनाडु में संपत्ति कर चोरी और असज्जित आकलन के खिलाफ आरडब्ल्यूए का व्यापक निरीक्षण का आग्रह
तमिलनाडु के विभिन्न निवासी कल्याण संघों (Residential Welfare Associations – RWAs) ने राज्य सरकार से पूरे राज्य में संपत्ति करों की धोखाधड़ी और आकलन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि संपत्ति करों की चोरी और भ्रष्ट आकलन से राज्य को सैकड़ों करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।
आरडब्ल्यूए संघ ने विशेष रूप से राजनीतिक हस्तियों के स्वामित्व वाली संपत्तियों की जांच का आग्रह किया है। उनका कहना है कि कई संपत्तियों पर उचित कर का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व घट रहा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इस मामले में दोषी अफसरों और कर चोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस मांग के पीछे यह पृष्ठभूमि है कि तमिलनाडु में संपत्ति कर प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और कर निर्धारण के असंतुलित तरीके अनेक विवादों का कारण बन रहे हैं। विभिन्न आरडब्ल्यूए ने लंबे समय से व्यवस्था में सुधार की अपील की है, ताकि कर चोरी को रोका जा सके और स्थानीय निकायों को उचित राजस्व प्राप्त हो सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरडब्ल्यूए संघ का मानना है कि यदि इन मामलों में शीघ्रता से कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य के विकास कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वे सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि वे न केवल संपत्ति करों की चोरों का पता लगाएं, बल्कि कर निर्धारण के मानक और निगरानी प्रणाली को भी मज़बूत करें।
इस मुद्दे पर तमिलनाडु की स्थानीय सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन इस बीच प्रासंगिक अधिकारियों से निवासियों और आरडब्ल्यूए की ओर से जवाबदेही की मांग बढ़ती जा रही है।