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पश्चिम बंगाल में इमामों और पुरोहितों को मिलने वाला वजीफा बंद करने पर सियासत गर्म

पश्चिम बंगाल में इमामों और पुरोहितों का वजीफा बंद करने पर सियासत तेज, कांग्रेस का भाजपा पर हमला

पश्चिम बंगाल सरकार ने इमामों व पुरोहितों के वजीफे को बंद करने का फैसला: कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि जून 2026 से राज्य में धार्मिक नेताओं को मिलने वाला वजीफा बंद कर दिया जाएगा। इस फैसले से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और कांग्रेस ने भाजपा पर चुनावी राजनीति के तहत अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करने का आरोप लगाया है।

यह निर्णय भाजपा सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें इमामों और पुरोहितों हेतु दी जाने वाली आर्थिक सहायता को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। यह कदम सरकार द्वारा धर्मनिरपेक्षता और समानता की नीति के अनुरूप बताया गया है।

कांग्रेस की विधायक आराधना मिश्रा-मोना ने भाजपा के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि चुनावों के समय विभिन्न धार्मिक समुदायों को खुश करने वाले वादे करना और चुनाव के बाद उन्हें बदलना राजनीतिक महत्वाकांक्षा का स्पष्ट प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूरे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री होने का जो दावा किया है, वह सही दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, परन्तु वजीफा रोकना पुरोहितों और इमामों दोनों के खिलाफ है।

भाजपा के टीआर श्रीनिवास ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री अधिकारी का एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राज्य की अल्पसंख्यक योजनाओं पर अत्यधिक बजट आवंटित करने का आरोप लगाया। श्रीनिवास ने बताया कि ममता सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए केवल 155 करोड़ रुपए आवंटित किए, परन्तु अल्पसंख्यक मामलों के तहत मदरसा शिक्षा एवं अन्य योजनाओं के लिए 5700 करोड़ रुपए निर्धारित किए थे।

कोलकाता में जमीयत उलेमा के जिला सचिव मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने कहा कि पूर्व सरकार द्वारा धार्मिक नेताओं को प्रदान किया गया भत्ता उनकी सेवाओं का सम्मान था, लेकिन नई सरकार द्वारा सहायता बंद करने का निर्णय उनके कार्यकलापों पर कोई आसार नहीं डालेगा क्योंकि वे इस सहायता पर निर्भर नहीं थे। कासमी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह निर्णय धर्मों के बीच भेदभाव समाप्त करने के लिए लिया गया है, तो वह इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य दायित्व सभी नागरिकों के लिए शिक्षित, स्वास्थ्ययुक्त और समुचित राज्य व्यवस्था सुनिश्चित करना है, न कि केवल धार्मिक संस्थानों पर ध्यान देना।

यह विवाद पश्चिम बंगाल की सियासी पृष्ठभूमि में धर्म और राजनीति के बीच जटिल संबंध को दर्शाता है, जहाँ धार्मिक समुदायों के साथ संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय की मांग दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार सभी वर्गों के लिए संतुलित नीति बनाएगी।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)