महाराष्ट्र में सड़क सुरक्षा में सुधार: 2026 के पहले चार महीनों में दुर्घटना मौतों में 8% की गिरावट
महाराष्ट्र में 2026 के जनवरी से अप्रैल तक सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस दौरान सड़क दुर्घटना मौतों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो राज्य के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
राज्य परिवहन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष के पहले चार महीनों के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 12,389 रही, जो पिछले वर्ष के समान अवधि की तुलना में 12,610 थी। इस समयावधि में मौतों की संख्या 5,233 रही, जबकि 2025 में यह 5,681 थी। इसी तरह, जानलेवा दुर्घटनाओं की संख्या 4,827 रही, जो पिछले वर्ष 5,275 थी।
अधिकाऱयों ने बताया कि जिले स्तर पर सड़क सुरक्षा की योजना बनाना और तकनीक आधारित निगरानी इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कई जिलों और शहरों में सड़क सुरक्षा आंकड़ों में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है। कड़क प्रवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और बेहतर तात्कालिक प्रतिक्रिया प्रणाली ने दुर्घटनाओं को कम करने में सहायता की है।
विशेष रूप से, वाशिम जिले में मौतों में 37 प्रतिशत की सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। बेड़ और नागपुर शहर में दोनों जगह लगभग 29 प्रतिशत की कमी देखी गई। नासिक शहर में 28 प्रतिशत और नवी मुंबई में 19 प्रतिशत की गिरावट हुई। साथ ही संगली, सातारा और भंडारा जिलों ने भी सुधार के प्रबल संकेत दिए हैं।
परिवहन विभाग ने बताया कि उनका लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करना है। इसके लिए राज्य भर में 332 विशेष प्रवर्तन दल तैनात किए गए हैं जो रडार सिस्टम और इंटरसेप्टर वाहनों के माध्यम से ट्रैफिक उल्लंघनों की निगरानी करते हैं। हेलमेट और सीटबेल्ट के उल्लंघन का पता लगाने के लिए AI तकनीक और रडार उपकरणों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच, अधिकारियों ने 22,000 से अधिक तेज़ रफ्तार के मामले दर्ज किए। हेलमेट न पहनने पर 2.64 लाख से अधिक वाहन चालकों को चालान किया गया, जबकि अन्य कई चालकों को विभिन्न उल्लंघनों के लिए दण्डित किया गया।
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, अब रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार, वाहन परीक्षण प्रणालियों का खुला कार्यान्वयन और दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में तेज़ आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ये कदम आगामी वर्षों में सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाएंगे।