‘घर के रंग’: कलाकार गणेश हुलोई की जीवन गाथा बच्चों के लिए
‘घर के रंग’ नामक ग्राफिक जीवनी में कलाकार गणेश हुलोई के जीवन और कला को बच्चों के लिए सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो वयस्कों के लिए भी अत्यंत रुचिकर और प्रेरणादायक है। यह पुस्तक ART1ST Books द्वारा प्रकाशित “द आर्ट एक्सप्लोरेशन सीरीज” की नवीनतम कृति है, जो कि किरण नादर म्यूजियम ऑफ आर्ट और अकार प्रकश के सहयोग से आई है।
इस पुस्तक की शुरुआत एक छोटे लड़के और एक विशाल नदी की कल्पना से होती है, जहाँ भूमि और जल एक-दूसरे में सम्मिलित हो जाते हैं। इस समृद्ध प्राकृतिक परिवेश में वनस्पति, जीव-जंतु और मछलियाँ सम्मिलित हैं, जो एक शांत और रोज़मर्रा की दुनिया को दर्शाती है। नदी के किनारे जीवन अपनी मौसमी लय में बहता रहता है, जिसमें लड़का न केवल एक दर्शक है, बल्कि इसके विकास में उत्सुक सहभागी भी है।
कलाकार परिचय
गणेश हुलोई स्वतंत्र भारत के प्रमुख कलाकारों में से एक हैं, जो विभाजन के युग के गवाह रहे और इसके प्रभाव ने उनकी कला को गहराई से प्रभावित किया है। उनकी विशेषता उनके अमूर्त दृश्यों और आंतरिक अनुभूतियों को चित्रित करने में निहित है। 1963 से 1993 तक कोलकाता के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट में शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने अनेक पीढ़ियों को कला में मार्गदर्शन प्रदान किया। अपनी शिक्षा इसी संस्था से प्रारंभ करने वाले हुलोई ने अपने व्यावसायिक कार्य की शुरुआत कलात्मक अनुभवों से की थी।
यह ग्राफिक जीवनी न केवल उनकी कला बल्कि उनके समय और सामाजिक परिवेश की झलक भी प्रदान करती है। पुस्तक में रंग, रूप और टेक्नीक के माध्यम से उनकी यात्रा को बच्चों के दृष्टिकोण से समझाया गया है, जो इसे हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयुक्त बनाता है।
गणेश हुलोई की कला में गहरे भावनात्मक और सांस्कृतिक घटक शामिल हैं, जो इस पुस्तक के पृष्ठों पर जीवंत हो उठते हैं। उनके चित्रों की सरलता और जटिलता दोनों ही यूँ प्रतीत होती है कि वे एक साथ बच्चों और वयस्कों के दिल को छू जाती है।
अंततः, ‘घर के रंग’ एक ऐसी कृति है जो गणेश हुलोई की कला और जीवन को समझने में मदद करती है, साथ ही यह शिक्षा और प्रेरणा से भरपूर है। यह ग्राफिक जीवनी भारतीय कला और कलाकारों की समृद्ध विरासत को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।