प्रसिद्ध उर्दू शायर बशीर बद्र का निधन, उर्दू साहित्य को बड़ी क्षति
उर्दू भाषा के विख्यात कवि और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित बशीर बद्र का निधन भोपाल में हुआ। वे 91 वर्ष के थे। उनकी परिवार ने इस बात की जानकारी दी।
बशीर बद्र का जन्म 1935 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था और ऐसा माना जाता है कि उन्होंने मात्र सात वर्ष की आयु से ही कविता लिखना शुरू कर दिया था।
उन्होंने उर्दू में कम से कम सात कविता संग्रह प्रकाशित किए, जबकि हिंदी में भी उनका एक संग्रह प्रकाशित हुआ है। उनकी प्रमुख ग़ज़ल कृतियों में इकाई, इमेज, आमद, आहट और कुल्लियत-ए-बशीर बद्र शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, उनकी कुछ उर्दू ग़ज़लों का संग्रह देवनागरी लिपि में उजाले अपनी यादों के के नाम से प्रकाशित हुआ है।
1999 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसके अलावा, उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी से चार बार और बिहार उर्दू अकादमी से एक बार पुरस्कार मिला।
1987 में साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान मेरठ स्थित उनका घर जल गया था, जिसमें उनके कई अप्रकाशित काम भी नष्ट हो गए। उसके बाद वे भोपाल आकर बसे।
उनकी मृत्यु पर गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर कहा, “आज हमारी उर्दू भाषा थोड़ी गरीब हो गई है… कवि और उनकी कविताएं हमारी यादों में सदैव जीवित रहेंगी।”
कांग्रेस सांसद और कवि इमरान प्रतापगढ़ी ने बशीर बद्र के निधन को अपूरणीय क्षति बताया।