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भारत के नर चीते कुनो से बहुत दूर भटक रहे हैं, पुनर्वन पलायन परियोजना पर उठ रहे हैं प्रश्न

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May 29, 2026 #kp-, #source
India’s male cheetahs are wandering far beyond Kuno, raising questions about rewilding project

कुनो से पार, राजस्थान के रणथंभौर तक भटकते नर चीते: पुनर्वन परियोजना की चुनौतियाँ

प्रोजेक्ट चीता भारत के वन्यजीवन संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हाल ही में, इस परियोजना के तहत बसे युवा नर चीते कुनो नेशनल पार्क से लगभग 150 किलोमीटर दूर राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व तक पहुँच कर चिंता और उत्सुकता दोनों को जन्म दिया है।

इस अप्रत्याशित यात्रा ने न केवल संरक्षण अधिकारियों को सक्रिय किया है, बल्कि वन्यजीवन और पर्यावरण संबद्ध विशेषज्ञों के बीच भी पुनर्वन और संरक्षण की रणनीतियों पर नए सवाल उठाए हैं। KP-2 नामक यह नर चीता रणथंभौर के पर्यटक क्षेत्रों में भी दिखाई दिया, जहाँ दुर्लभ रूप से बाघ, तेंदुआ और चीता तीनों को एक साथ देखा गया। यह वन्यजीवन प्रेमियों के लिए एक अनूठा दृश्य था।

KP-2 ने लगभग एक माह तक रणथंभौर के जंगलों में अभिवास किया, निर्भर स्थल की तलाश की और क्षेत्र की अपनी नयी सीमाओं को स्थापित करने का प्रयास किया। इसके बाद कुछ दिनों पूर्व इसे पकड़कर पुनः कुनो वापस लाया गया, जो कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के हालिया दौरे से ठीक पहले हुआ था।

KP-2 और उसके तीन अन्य भाई-बहन, सभी नर, अभी अपनी खोजपूर्ण अवस्था में हैं और दूर-दूर भटकने के लिए जाने जाते हैं। KP-3 नामक एक अन्य भाई भी हाल ही में कुनो छोड़कर राजस्थान के धोळपुर क्षेत्र में पहुंच चुका है। यह गतिविधियाँ परियोजना की सफलता के साथ-साथ छुपे हुए जोखिमों और चुनौतियों का संकेत देती हैं।

भारत के वन्यजीवन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली परियोजना चीता ने अफ्रीकी चीते को भारतीय जंगलों में पुनः स्थापित करने का कार्य किया है, जो कि भारतीय उपमहाद्वीप से एशियाई चीते के विलुप्त होने के बाद दशकों बाद संभव हुआ है। सितंबर 2022 में आधिकारिक रूप से शुरू हुई यह पहल प्राकृतिक संतुलन की बहाली और जैव विविधता के संरक्षण का उदाहरण है, लेकिन इसमें भू-राजनीतिक और पारिस्थितिकीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न भी निरंतर सामने आते रहे हैं।

पुनर्वन पहल की सफलता के लिए आवश्यक है कि आवासीय ज़मीनों का विस्तार, मानव-वन्यजीवन संघर्ष का न्यूनिकरण, और विभिन्न प्रजातियों के बीच सह-अस्तित्व के लिए रणनीतियाँ प्रभावी रूप से लागू की जायें। KP-2 के भटकने की घटना यह संकेत देती है कि वन्यजीव सीमाओं के अलावा भी अपने अस्तित्व के लिए स्थान तलाश रहे हैं और हमें इससे जुड़े खतरों और अवसरों को समझना आवश्यक है।

प्रोजेक्ट चीता न केवल एक संरक्षण प्रयास है, बल्कि यह भारत के समृद्ध एवं विविध वन्यजीवन की रक्षा के लिए एक परिवर्तनशील कहानी भी है। भविष्य में इससे जुड़ी जानकारियाँ और अनुसंधान इस पहल के सुधार और सफलतापूर्वक विस्तार के लिए निर्णायक होंगी।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)