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दिल्ली: महिला पहलवानों के शोषण मामले में बृजभूषण शरण बरी

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने WFI के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। बृजभूषण शरण सिंह के साथ विनोद तोमर को भी बरी किया गया है।फैसले से पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मैं सिर्फ वही सुनूंगा जो कोर्ट कहेगा। मेरे हाथ में कुछ भी नहीं है।

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों ने खेल जगत में भूचाल ला दिया था। यह मामला जनवरी 2023 में तब प्रकाश में आया जब कई शीर्ष महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर बृजभूषण शरण सिंह को पद से हटाने की मांग की।पहलवानों का आरोप था कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण किया है। इन आरोपों में भारतीय कुश्ती महासंघ के कुछ कोचों की संलिप्तता की बात भी कही गई थी। इस गंभीर मामले को लेकर महिला खिलाड़ियों ने आवाज उठाई और न्याय की गुहार लगाई।मामले की गंभीरता को देखते हुए, खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद, इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया।

जांच के दौरान, बृजभूषण शरण सिंह को अपने पद से हटना पड़ा और कुश्ती महासंघ का कार्यालय भी उनके आवास से स्थानांतरित कर दिया गया।बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ छह पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी शिकायतों के आधार पर पुलिस ने पूर्व सांसद के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की थी। 15 जून 2023 को पुलिस ने सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (शील भंग करना), 354ए (यौन टिप्पणी), 354डी (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध के लिए आरोप पत्र दायर किया था। शिकायतकर्ताओं ने पहले बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच सही रास्ते पर है। बृजभूषण सिंह पर एक नाबालिग पहलवान ने भी आरोप लगाए थे। हालांकि, बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली और दिल्ली पुलिस ने उस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के तहत क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )