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UP-बलिया के मशहूर डॉक्टर विनेश कुमार के यहाँ सरकारी जिला अस्पताल में बीमार बच्चों की उमड़ी भीड़

यूपी के बलिया में इन दिनों तेज़ी से मौसम बदलने की वजह से बच्चे सर्दी में बीमार हो रहे है ऐसे में सरकारी अस्पताल में बीमार बच्चो की डॉक्टर के पास भीड़ लगी हुई है। मौसम के मिजाज़ में अचानक बदलाव और बढ़ती ठंड के कारण जिला अस्पताल में सर्दी जुकाम खांसी निमोनिया के बच्चों की संख्या में अचानक बढ़त देखी जा रही है।सुबह शाम ठंड पड़ रही है, जबकि दिन में कभी कभी धूप निकलने के कारण मौसम गर्मा भी रहा है।लेकिन आज ठंडी के साथ हल्की बूंदाबांदी छोटे बच्चों और बुजुर्गो की मुश्किले बढ़ा दी है। जिसका प्रभाव बच्चों की स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले अधिकतर बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम और तेज बुखार से पीड़ित बताये गये है।इस सम्बन्ध में अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञों के यहां पीड़ित बच्चों की खासी भीड़ देखी जा रही है।

इधर मौसम के प्रतिकुल होने के बावजूद बच्चे मौका मिलते ही खेलने लग रहे हैं।जिसके कारण वे बिमार हो रहे हैं।ऐसे मौसम में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. एक के उपाध्याय बताते हैं कि इस मौसम में बच्चों को वायरल निमोनिया की संख्या बढ़ जाती है इस साल भी वायरल निमोनिया के पेशेंट ज्यादा आ रहे हैं। सर्दी, खांसी और तेज बुखार और सांस लेने की तकलीफ होने लगती है। आम तौर पर ऐसे मरीजों को ओपीडी लेवल पर दवाइयां देकर छोड़ दिया जाता है। मगर यदि बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो मरीज को भर्ती करके उचित उपचार यहां दिया जा रहा है। विशेषज्ञ डा.उपाध्यात का कहना है कि बच्चों के माता-पिता को चाहिए की वे अपने बच्चों को ठंड से बचाएं और भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से बचे, स्वच्छ पानी और साफ सफाई का विरोध ध्यान रखें।सांस की दिक्कत होने पर तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से उपचार कराये। अन्यथा मरीज बच्चों की तकलीफ और बढ़ सकती हैं जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल विशेषज्ञ डा. विनेश कुमार से ICN संवाददाता आसिफ जै़दी ने बच्चों में बढ़ते संक्रमण को लेकर बात की तो दोनों बाल रोग विशेषज्ञों एक ही मत रहा। जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डा. विनेश कुमार ने सर्दी के आते ही सर्दी के प्रभाव से बीमार होने वाले बच्चों के इलाज और बचाव के उपाय पूछे तो उन्होंने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों के बीमार होने की संख्या बढ़ जाती है। इससे सर्दी जुकाम और तेजबुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या इन दिनों काफी बढ़ रही है। ऐसे में बदलते मौसम को देखते हुए माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को ढंग से गर्म कपड़े पहनाए,। बच्चों को कम से कम बाहर निकले थे, क्योंकि बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होती है इस कारण बच्चे जल्दी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। अगर कोई दिक्कत हो रही है तो तत्काल डॉक्टर की सलाह लेकर उसका उपचार समुचित रुप से शिशु रोग चिकित्सको से ही कराये।मेडिकल स्टोर दवा लेकर न कराये । कपड़ा हल्का और तीन लेयर में पहनाए नियमित गुनगुने पानी का प्रयोग करें, ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो।बच्चों के शरीर को ढक कर रखें, गर्मी महसूस होने पर सारे कपड़े उतार कर बच्चों को एकदम वस्त्र विहिन ना करें। सर्दी जुकाम बुखार या गले की खरखराहट और सांस लेने में तकलीफ होने पर तत्काल डॉक्टर से सलाह लें, डाक्टर सलाह का ध्यान के साथ पालन करे। इस तरह से हम बदलते हुए मौसम से उत्पन्न होने वाली बीमारियों से अपने बच्चों को बचा सकते हैं।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}