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दिल्ली: धूल-मुक्त सड़कें बनाने के लिए हुआ समझौता

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में लोक निर्माण विभाग, सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।क्या है समझौते का उद्देश्य?इस समझौते का उद्देश्य दिल्ली की सड़कों को धूल-मुक्त बनाना, शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना और सड़कों के वैज्ञानिक प्रबंधन को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण को बल मिलेगा और दिल्ली को स्वच्छ, हरित एवं टिकाऊ शहर बनाने में मदद मिलेगी।लोगों को मिलेगा बेहतर वातावरणकार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, इस साझेदारी के तहत आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर सड़क प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह पहल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सुधारने और नागरिकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अहम साबित होगी।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“‘मेरे सवालों पर कथा साहित्य का प्रभाव पड़ा’: कार्लो गिंज़बर्ग (1939-2026), माइक्रोहिस्ट्री के प्रणेता”],”content_results”:[“कार्लो गिंज़बर्ग: माइक्रोहिस्टोरी के क्षेत्र के प्रणेता का निधनइतालवी इतिहासकार कार्लो गिंज़बर्ग, जिन्हें माइक्रोहिस्टोरी के संस्थापकों में से एक माना जाता है, का 17 जून 2026 को निधन हो गया। उनकी उम्र 87 वर्ष थी। गिंज़बर्ग ने इतालवी पुनर्जागरण से लेकर प्रारंभिक आधुनिक यूरोपीय इतिहास तक विभिन्न विषयों में अपना योगदान दिया। उनकी गहन शोध प्रणाली और दृष्टिकोण ने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी बदलाव लाए।गिंज़बर्ग की प्रमुख रचनाओं में The Cheese and the Worms: The Cosmos of a Sixteenth Century Miller, The Night Battles, तथा Ecstasies: Deciphering the Witches’ Sabbath शामिल हैं। इन कार्यों ने न केवल इतिहास को नये आयाम दिए, बल्कि कला इतिहास, साहित्य अध्ययन और इतिहासलेखन के सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।उन्होंने 2010 में बाल्ज़न पुरस्कार प्राप्त किया और 2013 में अमेरिकी फिलॉसफिकल सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में चुने गए।2019 में कोलकाता में भारतीय प्रकाशक नवीन किशोर के साथ बातचीत के दौरान, गिंज़बर्ग ने अपनी पेशेवर यात्रा, यहूदी धर्म के प्रति अपने “बनने” की प्रक्रिया, विराम चिह्नों के प्रति जुनून और अपनी रचनात्मक सोच पर कथा साहित्य के गहरे प्रभाव के बारे में चर्चा की।उन्होंने कहा, “ऐसे संवाद आमतौर पर बीच में शुरू होते हैं, जिसमें पहले की बातचीत का अनुभव और आगे की चर्चा की उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए मैं सीधे अपने विषय में उतर जाता हूँ।” उनके अनुसार, “एक ऐसे जीवंत परिदृश्य में प्रवेश करना जो पहले किसी ने नहीं देखा, अत्यंत रोमांचकारी होता है। सबसे पहले अपनी जड़ों की खोज करना, फिर इतिहास के जीवन के संकेतों को समझना, और अंततः इतिहासकार बनना एक गहन अनुभव है।”कार्लो गिंज़बर्ग ने माइक्रोहिस्टोरी को एक नई दिशा दी और इतिहास को अधिक मानवीय, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक संदर्भों में समझने की विधि पेश की। उनके विचार और शोध आज भी इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।”]}