इस योजना की शुरुआत एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जा रही है, जिसके तहत दिल्ली की चार प्रमुख सड़कें “मॉडल रोड” में बदली जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक, इन सड़कों को इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि वहां से धूल उड़ने की संभावना न्यूनतम रह जाए। इन सड़कों पर सिविल वर्क के साथ-साथ हरियाली बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा, ताकि सड़क के किनारे और बीच के हिस्सों से धूल न उठे। किन कामों पर रहेगा फोकस
पीडब्ल्यूडी की इस पहल का मकसद धूल प्रदूषण को उसकी जड़ में ही खत्म करना है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित सड़कों पर:
- गड्ढों की मरम्मत
- दीवार से दीवार तक पक्का फर्श (वॉल-टू-वॉल पाविंग)
- सेंट्रल वर्ज और किनारों पर लैंडस्केपिंग
- पौधारोपण और हरित पट्टी का विकास
अधिकारियों का कहना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे धीरे-धीरे शहर की अन्य सड़कों पर भी लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद तेज हुई तैयारी
इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की थी, जिसमें सड़क की धूल को प्रमुख कारणों में से एक माना गया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने इस रोड रिडेवलपमेंट प्लान को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला लिया।
दिल्ली में कितनी सड़कों को सुधार की जरूरत?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 3,300 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं, जिन्हें पुनर्निर्माण या अपग्रेडेशन की जरूरत है।
- लगभग 800 किमी सड़कें पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत
- करीब 1,200 किमी सड़कें नगर निगम के अधीन
- और लगभग 1,000 किमी सड़कें अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित हैं
पीडब्ल्यूडी की योजना के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2026 के बीच 160 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का किया जाएगा। इसके अलावा, 85.70 किलोमीटर सड़कों पर गहन हरियाली और लैंडस्केपिंग का काम किया जाएगा।इन सभी परियोजनाओं पर 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है।
बार-बार सड़क खुदाई से मिलेगी राहत
नई योजना के तहत सड़क के नीचे अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट्स भी बनाए जाएंगे, ताकि बार-बार केबल या पाइपलाइन के लिए सड़क काटने की जरूरत न पड़े।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे और लक्ष्य है कि सभी काम एक साल के भीतर पूरे कर लिए जाएं।
धूल नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम
सड़क निर्माण के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी दो और अहम प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है:
- 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन और वॉटर टैंकर, जो नियमित रूप से सड़कों की सफाई करेंगे
- 250 वॉटर स्प्रिंकलर मशीन, जो सड़कों पर पानी का छिड़काव कर धूल को उड़ने से रोकेंगी
दिल्ली सरकार की यह पहल साफ संकेत देती है कि अब वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थायी समाधान पर जोर दिया जा रहा है। अगर यह योजना जमीन पर सही तरीके से लागू होती है, तो राजधानी की हवा और सड़कों, दोनों की हालत बेहतर हो सकती है।

