भाजपा कार्यालयों पर हमले से लोकतंत्र को लगा आघात, भगवंत मान सरकार की कार्यशैली पर सवाल
नई दिल्ली। पंजाब में भाजपा कार्यालयों पर हुई हिंसक घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इन घटनाओं को लोकतंत्र के लिए एक कलंक बताया है।
इतिहास में इतने सार्वजनिक हमलों की घटनाएं दुर्लभ हैं, जहां राजनीतिक विरोधी दलों के कार्यालयों को निशाना बनाया गया हो। तरुण चुघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में बताया कि तरनतारन, लुधियाना और जीरकपुर के भाजपा कार्यालयों पर हमला किया गया, जिनमें तोड़फोड़ के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हिंसक कार्रवाई हुई।
उन्होंने इसे पंजाब सरकार की गंभीर असफलता बताया और सवाल उठाया कि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अब तक उचित कार्रवाई क्यों नहीं की है। चुघ ने पुलिस की निष्क्रियता पर भी कड़ी आपत्ति जताई और यह भी संकेत दिया कि पुलिस और इन तत्वों के बीच संबंध हो सकते हैं।
भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने भी इस प्रकार के राजनीतिक हिंसा और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक धमकियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राज्य सरकार लोकतांत्रिक संस्थानों की कमजोरियों का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
शर्मा ने संजीव अरोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच एजेंसाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब भी उनकी पार्टी के खिलाफ कार्रवाई होती है, आप पार्टी ‘लोकतंत्र खतरे में’ का नारा देकर ध्यान भटकाने की कोशिश करती है।
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा पंजाब को ‘ममता बनर्जी के बंगाल’ जैसी स्थिति में बदलने की किसी भी कोशिश को विफल कर देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और पुलिस को तुरंत कठोर कदम उठाने चाहिए।
इस संपूर्ण विवाद ने पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना दिया है, जहां दो मुख्य दलों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इस मामले को सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न के रूप में देख रहे हैं।