Banda News: समाजवादी पार्टी (सपा) के बांदा जिले में एक अजीबोगरीब नाटक सामने आया है, जहां पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच लेटरपैड के जरिए निष्कासन की होड़ मच गई है। जिला अध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा और राष्ट्रीय सचिव (प्रवक्ता) प्रमोद गुप्ता एक-दूसरे को पार्टी से निष्कासित करने के लिए लेटरपैड की जंग छेड़ चुके हैं, जिससे सपा की साख पर सवाल उठ रहे हैं। दोनों नेताओं के वायरल लेटरपैड ने बांदा में पार्टी की जमकर किरकिरी कराई है।

मामला तब गरमाया जब मधुसूदन कुशवाहा ने एक लेटरपैड जारी कर प्रमोद गुप्ता पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए उन्हें सपा से निष्कासित करने का ऐलान किया। कुशवाहा ने दावा किया कि यह कार्रवाई सपा मुखिया अखिलेश यादव के निर्देश पर की गई है। जवाब में, प्रमोद गुप्ता ने भी पलटवार करते हुए एक लेटरपैड जारी किया, जिसमें उन्होंने कुशवाहा पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया और उन्हें पार्टी से बाहर करने की घोषणा की। दोनों नेताओं ने अपने-अपने लेटर में सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का हवाला दिया है, जिससे स्थिति और उलझ गई है।
सोशल मीडिया पर दोनों लेटरपैड के वायरल होने के बाद सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भ्रम की स्थिति है। स्थानीय लोग इस घटना को पार्टी की आंतरिक कलह और नेतृत्व के कमजोर समन्वय का परिणाम मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक लड़ाई से सपा की छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है, खासकर तब जब पार्टी आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है।

बांदा में सपा की इस लेटरपैड जंग ने न केवल पार्टी की एकता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस पैदा कर दिया है। अब सबकी निगाहें अखिलेश यादव पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।


