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दिल्ली: प्रदूषण पर नई रिपोर्ट का बड़ा खुलासा

दिल्ली की खतरनाक एयर क्वालिटी के लिए जो उंगलियां खेतों में आग लगाने और पराली जलाने की ओर इशारा कर रही थीं, उन्हें अब अपनी दिशा बदलनी पड़ सकती है।

दिल्ली की खतरनाक वायु गुणवत्ता के लिए अब तक जिस पराली जलाने को सबसे बड़ा दोषी माना जाता रहा है, उस धारणा पर एक नई रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की एक ताजा स्टडी के मुताबिक, पराली जलाने का दौर खत्म होने के बाद भी दिल्ली में PM2.5 (पीएम 2.5) का स्तर कम नहीं हुआ, बल्कि दिसंबर महीने में यह और ज्यादा गंभीर हो गया।

पराली के बाद भी क्यों बढ़ा प्रदूषण
अध्ययन में अक्तूबर और नवंबर को “अर्ली विंटर” अवधि के रूप में देखा गया है, जब खेतों में आग का प्रभाव सबसे ज्यादा रहता है। इसके मुकाबले दिसंबर को “पोस्ट-फार्म फायर” चरण माना गया, जब पराली जलाने का असर लगभग नगण्य हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में पूरे एनसीआर में फैला स्मॉग न सिर्फ व्यापक था, बल्कि पराली जलाने वाले महीनों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर रहा। 

रिपोर्ट यह भी बताती है कि दिल्ली की हवा में मौजूद पीएम 2.5 का पूरा बोझ सिर्फ राजधानी से नहीं आ रहा। 1 से 15 दिसंबर के बीच दिल्ली का योगदान कुल पीएम 2.5 में सिर्फ 35 प्रतिशत रहा, जबकि 65 प्रतिशत प्रदूषण आसपास के एनसीआर जिलों और उससे भी दूर के इलाकों से आया। यह आंकड़ा साफ करता है कि समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )