इस चुनाव चक्र में राजनीतिक दल मतदाताओं तक पहुंचने के लिए डिजिटल मीडिया को केंद्र में रख रहे हैं। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर खास तौर पर तैयार किए गए कैंपेन मैसेज, शॉर्ट वीडियो और विज़ुअल स्टोरीज़ तेजी से शेयर की जा रही हैं। डिजिटल कंटेंट अब सिर्फ सहायक माध्यम नहीं, बल्कि चुनावी प्रचार का प्रमुख हथियार बन चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने डिजिटल और ऑफलाइन प्रचार के बीच एक जैसी विज़ुअल पहचान बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। पार्टी ने मराठी नारे “त्यांच्या भूलथापांना भुलणार नाही” को सोशल मीडिया से लेकर होर्डिंग्स तक प्रमुखता से इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही “मुंबई आता थांबणार नाही” टैगलाइन को भी ऑनलाइन और आउटडोर दोनों प्लेटफॉर्म्स पर आक्रामक रूप से प्रमोट किया गया।
हालांकि, पार्टी को AI-जनरेटेड वीडियो को लेकर आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है, जिनमें काल्पनिक किरदारों और फिल्मी सितारों को नगर निगम उम्मीदवारों के रूप में दिखाया गया। मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति खासतौर पर युवा मतदाताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो शॉर्ट वीडियो और मीम-कल्चर से पहले से जुड़ाव रखते हैं। यह ट्रेंड इन्फ्लुएंसर-ड्रिवन और विज़ुअल कैंपेनिंग की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) समेत अन्य दलों ने अपने प्रचार में अलग रुख अपनाया है। उनका फोकस डिजिटल प्रयोगों से ज्यादा पार्टी की विरासत और प्रशासनिक प्रदर्शन पर है। कैंपेन में पहले पूरे किए गए नगर निगम और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्रमुखता दी जा रही है।
मुंबई कोस्टल रोड जैसी बड़ी परियोजनाओं को आउटडोर होर्डिंग्स के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रचारित किया जा रहा है। पार्टी की मैसेजिंग का केंद्र बिंदु इनोवेशन नहीं, बल्कि डिलीवरी और जमीनी नतीजे हैं।
कुल मिलाकर, BMC चुनाव 2026 में मुंबई का चुनावी मैदान अब सिर्फ सड़कों और चौक-चौराहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया फीड्स और मोबाइल स्क्रीन भी इस सियासी जंग का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।

