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दिल्ली: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी और तीन अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपपत्र दायर किया

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय राजधानी में करीब 46 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने के मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी और तीन अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपपत्र दायर किया है। इसमें कहा गया कि जमीन हस्तांतरित किए जाने में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) और अन्य मालिकाना कागजात में हेराफेरी की गई। अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहले भी 10 नवंबर को लाल किले में हुए धमाके से जुड़े सफेदपोश आतंकवाद जांच के दायरे में आ चुकी है। इसमें 15 लोगों की मौत हुई थी।

ईडी ने बुधवार को एक बयान में बताया कि साकेत स्थित मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में सिद्दीकी, उनकी ओर से संचालित तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन और विनोद कुमार तथा श्रीओम चौहान नामक दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की गई है। ईडी ने कथित धोखाधड़ी वाले जमीन अधिग्रहण मामले में सिद्दीकी, कुमार और चौहान को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने बताया कि यह जांच दिल्ली पुलिस की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। ये एफआईआर दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर में स्थित जमीन के कथित तौर पर धोखाधड़ी से अधिग्रहण से संबंधित हैं। इसमें फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया। इनमें जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य मालिकाना कागजात शामिल हैं।

कई मालिकों की हो चुकी थी मृत्यु : जांच एजेंसी के अनुसार, जिन जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को हस्तांतरित की गई थी, उनकी तारीख 7 जनवरी, 2004 थी लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि कई मूल मालिकों की मृत्यु 2004 से दशकों पहले ही हो चुकी थी। एजेंसी ने कहा कि जांच में पता चला कि आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य ने जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए जमीन के असली मालिकों के हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान की जालसाजी करने की साजिश रची।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )