सीजेपी ने दिल्ली सरकार के उस आदेश का स्वागत किया है, जिसमें प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया कि केवल कार्रवाई पर रोक पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर औपचारिक रूप से वापस ली जानी चाहिए।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार के नोटिफिकेशन की भाषा जंतर-मंतर समझौते के दौरान किए गए वादों के अनुरूप नहीं है। उनका दावा है कि दिल्ली सरकार के पास एफआईआर वापस लेने का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में इस पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश की गलत व्याख्या कर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है।सौरव दास ने केंद्र और दिल्ली सरकार से प्रदर्शनकारियों से किए गए सभी वादों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौते का पूरी भावना से पालन नहीं हुआ तो युवाओं का आक्रोश फिर सड़कों पर दिखाई दे सकता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल की भी आलोचना की। उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 13 एफआईआर दर्ज की थीं और 2,800 से अधिक लोगों की पहचान की है।

