शनिवार को चंदौली में आयोजित कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में प्रदेश के छह जिलों—चंदौली, शामली, औरैया, महोबा, अमेठी और हाथरस—में प्रस्तावित एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास किया। करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन परिसरों को न्यायिक अवसंरचना के सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताया गया।
इस अवसर पर सीजेआई ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय के आपसी सहयोग से उन जिलों में आधुनिक जिला न्यायालय परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां अब तक पर्याप्त न्यायिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। पहले चरण में चयनित इन छह जिलों में भूमि चयन, भवन डिज़ाइन की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं तथा शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रस्तावित एकीकृत न्यायालय परिसरों में एक ही परिसर के भीतर न्यायालय भवन, अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, पर्याप्त पार्किंग, कैंटीन, स्कूल और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे न्यायिक कार्यों में सहूलियत बढ़ेगी और वादकारियों व अधिवक्ताओं को बेहतर वातावरण मिलेगा।
उन्होंने कहा कि अब अधिवक्ताओं को जर्जर और अव्यवस्थित चैंबरों में काम नहीं करना पड़ेगा, बल्कि आधुनिक बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षित और सुविधाजनक कार्यस्थल उपलब्ध होंगे। इन परिसरों का निर्माण विश्वविख्यात कंपनी Larsen & Toubro के माध्यम से कराया जाएगा, जिससे गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ये छह जिले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए हैं और आने वाले समय में वाराणसी सहित अन्य जिलों में भी इसी मॉडल पर एकीकृत न्यायालय परिसरों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बार एसोसिएशन, न्यायिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश सहित सभी उपस्थित न्यायाधीशों का अभिनंदन किया और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।