राजधानी में लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए लू (हीट स्ट्रोक) से निपटने के लिए अस्पतालों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में हीट स्ट्रोक यूनिट को सक्रिय कर दिया गया है, वहीं अन्य सरकारी अस्पतालों ने भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं। आरएमएल अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अमलेंदु यादव ने बताया कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए अस्पताल पूरी तरह अलर्ट है। हीट स्ट्रोक यूनिट में मरीजों के उपचार के लिए विशेष टब की व्यवस्था की गई है, जिसमें करीब 150 लीटर पानी और 50-55 किलोग्राम बर्फ के साथ मरीज को 20-25 मिनट तक रखा जाता है, ताकि शरीर का तापमान तेजी से कम किया जा सके। जरूरत पड़ने पर मरीज को वेंटिलेटर और वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।
टैको तकनीक से भी देते हैं उपचार-
अस्पताल में ‘टैको’ (टेपॉलिन असिस्टेड कूलिंग ऑस्किलेशन) तकनीक से भी इलाज की तैयारी की गई है। इस तकनीक के तहत मरीज को तिरपाल में लिटाकर ठंडा किया जाता है। इसके लिए एसी युक्त मोबाइल हीट स्ट्रोक एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं लोकनायक अस्पताल और जीटीबी अस्पताल में भी हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए बेड आरक्षित करने की योजना बनाई गई है। डॉक्टरों की टीम को अलर्ट कर दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उपचार दिया जा सके।
लोग बरतें सावधानी –
विशेषज्ञों के अनुसार, खुले में काम करने वाले मजदूर, सुरक्षाकर्मी, रेहड़ी-पटरी वाले, डिलीवरी बॉय, बुजुर्ग और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। ऐसे में लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने, सिर ढककर बाहर निकलने और शरीर का तापमान बढ़ने पर तुरंत ठंडक देने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें, ताकि समय रहते उपचार मिल सके।
हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए यह जरूरी –
पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें।
दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक के बीच धूप में न निकले।
सिर को टोपी और गमछे से ढककर रखे।
मानसिक दवाओं का सेवन करने वाले मरीज बरते एहतियात।
छोटे बच्चे और बुजुर्गों की भी सावधानी बरतना है जरूरी।
शरीर का तापमान बढ़ने पर ठंडे पानी की गीली पट्टी माथे पर जरूर रखें।
ठंडे पानी से नहा लें।
बाहर जाते समय आंखों पर काला चश्मा लगाकर रखे।

