अस्पताल में ‘टैको’ (टेपॉलिन असिस्टेड कूलिंग ऑस्किलेशन) तकनीक से भी इलाज की तैयारी की गई है। इस तकनीक के तहत मरीज को तिरपाल में लिटाकर ठंडा किया जाता है। इसके लिए एसी युक्त मोबाइल हीट स्ट्रोक एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं लोकनायक अस्पताल और जीटीबी अस्पताल में भी हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए बेड आरक्षित करने की योजना बनाई गई है। डॉक्टरों की टीम को अलर्ट कर दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उपचार दिया जा सके। लोग बरतें सावधानी –
विशेषज्ञों के अनुसार, खुले में काम करने वाले मजदूर, सुरक्षाकर्मी, रेहड़ी-पटरी वाले, डिलीवरी बॉय, बुजुर्ग और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। ऐसे में लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने, सिर ढककर बाहर निकलने और शरीर का तापमान बढ़ने पर तुरंत ठंडक देने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें, ताकि समय रहते उपचार मिल सके। हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए यह जरूरी – पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें।
दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक के बीच धूप में न निकले। सिर को टोपी और गमछे से ढककर रखे। मानसिक दवाओं का सेवन करने वाले मरीज बरते एहतियात। छोटे बच्चे और बुजुर्गों की भी सावधानी बरतना है जरूरी। शरीर का तापमान बढ़ने पर ठंडे पानी की गीली पट्टी माथे पर जरूर रखें। ठंडे पानी से नहा लें। बाहर जाते समय आंखों पर काला चश्मा लगाकर रखे।

