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डिजिटल डिटॉक्स: क्या यह वाकई काम करता है या यह मात्र एक अन्य वेलनेस ट्रेंड है

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May 18, 2026 #source
Digital detox: Does it really work or is it just another wellness trend?

डिजिटल डिटॉक्स: क्या यह वास्तव में प्रभावी है?

आज की डिजिटल दुनिया में हम हर पल स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। ईमेल भेजने से लेकर खाना ऑर्डर करने तक, हमारी दैनिक गतिविधियाँ तकनीक पर निर्भर हो चुकी हैं। लगातार जुड़े रहने से शारीरिक और मानसिक थकान हो सकती है, इसलिए कुछ लोग ‘डिजिटल डिटॉक्स’ का अभ्यास कर रहे हैं।

डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है तकनीकी उपकरणों और सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाना। इसका उद्देश्य अधिक संयमित जीवन जीना और ऑफलाइन रिश्तों को बढ़ावा देना है। यह अवधारणा लोकप्रिय होती जा रही है, और कुछ लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए डिजिटल रिट्रीट्स में भारी खर्च भी कर रहे हैं।

डिजिटल डिटॉक्स क्या है?

डिजिटल डिटॉक्स शब्द ‘डिटॉक्सिफिकेशन’ से लिया गया है, जो किसी नशे की लत से छुटकारा पाने की चिकित्सकीय प्रक्रिया है। इसी तरह, डिजिटल डिटॉक्स में तकनीक से दूर रहकर जीवन के अधिक सार्थक पहलुओं का अनुभव किया जाता है।

तकनीक से जुड़ी समस्याएँ

ऑस्ट्रेलिया में औसतन युवा वर्ग दिन में नौ घंटे स्क्रीन पर बिताता है। 45 से 64 वर्ष आयु के बीच के वयस्क भी छह घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं। इससे सूचना का अतिरेक होता है और मानसिक दबाव बढ़ता है। सोशल मीडिया थकान भी बढ़ती है, जो कि लगातार ऑनलाइन रहने के कारण होती है।

डिजिटल डिटॉक्स के समर्थक दावा करते हैं कि इससे मानसिक स्थिति में सुधार होता है और जीवन में संतुलन आता है, जबकि आलोचक इसे सिर्फ एक नया ट्रेंड मानते हैं। अधिक शोध और व्यावहारिक परीक्षणों की आवश्यकता है ताकि इस विषय पर स्पष्ट निष्कर्ष निकाले जा सकें।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)