अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत सेक्टर, कॉर्पोरेट कार्यालयों, सरकारी भवनों और ऊंची इमारतों के पास चिन्हित स्थानों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। यदि किसी व्यक्ति में गैर-संक्रामक रोग (एनसीडी) का पता चलता है, तो डॉक्टरों द्वारा उपचार के विकल्प सुझाए जाएंगे। तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के मामलों में थ्रोम्बोलिटिक (खून का थक्का तोड़ने वाली) थैरेपी, जिसकी निजी अस्पतालों में लगभग 40 हजार रुपये लागत आती है। यह सेवा सेक्टर-10ए स्थित सिविल अस्पताल में निशुल्क प्रदान की जाएगी। तीन लाख लोगों की जा चुकी है स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उच्च रक्तचाप और हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों में स्ट्रोक की संभावना को खत्म करने के लिए डॉक्टर रैपिड स्ट्रोक स्क्रीनिंग तकनीक (चेहरा, हाथ, भाषण, समय) को अपनाएंगे। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जिले में लगभग तीन लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगभग 6.80 लाख गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की जांच लंबित है।

