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ग्रेटर नोएडा: जिलाधिकारी पांच लाख जुर्माने के खिलाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें एक छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अवैध रूप से हिरासत में रखने पर उनके वेतन से पांच लाख रुपये का मुआवजा काटने का निर्देश दिया गया था।

अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की 25 वर्षीय छात्रा (इतिहास स्नातक) आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। 13 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आकृति चौधरी और सामाजिक कार्यकर्ता-पत्रकार सत्य वर्मा पर सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगा दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला

2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए उनकी हिरासत को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कई कड़ी टिप्पणियां कीं। अदालत ने पाया कि हिरासत की पूरी कार्रवाई राज्य द्वारा “गढ़ी गई” एक कहानी पर आधारित थी।वेतन से पांच लाख की कटौतीकोर्ट ने छात्रा को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया और निर्देश दिया कि यह राशि डीएम मेधा रूपम और एसएचओ (एसएचओ) सहित इस आदेश के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से काटी जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि डीएम और मामले की फाइल तैयार करने में शामिल पुलिस अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में हाई कोर्ट की यह नाराजगी दर्ज की जाए।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )