नोएडा। एटीएम बूथ के अंदर सहायता के नाम पर डेबिट कार्ड बदलकर कैश निकालने वाले चार आरोपियों को कोतवाली फेज थ्री पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसमें सरगना भी शामिल है। ये बदमाश दिवाली से पहले वारदात को अंजाम देने नोएडा आए थे। पुलिस ने इनके पास से 67 डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है।
नोएडा सेंट्रल की एडीसीपी शैव्या गोयल शैव्या गोयल ने बताया कि कोतवाली फेज थ्री पुलिस ने एटीएम बूथ में डेबिट कार्ड बदलकर कैश निकालने वाले गिरोह के चार बदमाशों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी नोएडा व एनसीआर में सुनसान जगह पर लगे एटीएम बूथ के पास खड़े होते थे। यहां एटीएम बूथ में आने वाले वृद्ध नागरिकों और महिलाओं को देखकर उनकी मदद के लिए एटीएम बूथ के अंदर जाते थे और उन्हें झांसा देकर कार्ड बदल लेते थे। इस दौरान पासवर्ड भी देख लेते थे। इसके बाद दूसरे एटीएम बूथ में जाकर तुरंत नकदी निकाल लेते थे। पुलिस को इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के गया निवासी पंकज सिंह कुमार, धमेंद्र, नवादा निवासी नवलेश सिंह और गोपाल सिंह के रूप में हुई है। पंकज और नवलेश साढ़ू हैं। सभी वर्तमान में अलग अलग स्थानों पर रहते हैं। पंकज पांचवीं पास है। धर्मेंद्र ने सातवीं, नवलेश सिंह ने दसवीं और गोपाल सिंह ने 12वीं तक की पढ़ाई की है। दिवाली के मौके पर ये लोग नोएडा व आसपास के शहरों में एटीएम बूथों की रेकी कर रहे थे। इनके पास से अलग-अलग बैंकों के 67 डेबिट कार्ड, एक मोबाइल और नकदी समेत अन्य सामान बरामद हुआ है।
100 से अधिक वारदातें की : पुलिस पूछताछ में पता चला कि ये बदमाश पिछले पांच साल से इस तरह की वारदात कर रहे थे। अब तक इन लोगों ने 100 से अधिक घटनाएं की है। गिरोह का सरगना पंकज कुमार है। पंकज ही बूथ के अंदर जाता है और मदद के नाम पर डेबिट कार्ड बदलता है। अन्य तीन बाहर रहते हैं। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। ये आरोपी ऐसे एटीएम बूथ को निशाना बनाते थे जहां सिक्योरिटी गार्ड नहीं हो।
टेप लगाकर भी करते थे ठगी : ये आरोपी एटीएम बूथ को चिन्हित कर मशीन में उस जगह पर काला टेप लगा देते हैं ,जहां से रुपये निकलते हैं। जब कोई ग्राहक बूथ के अंदर मशीन से पैसे निकालने आता है तो पैसे निकलने की आवाज तो आती है पर रकम बाहर नहीं आती। मशीन से जब पैसा नहीं निकलता तो ग्राहक कुछ ही देर में थक हारकर बाहर चला जाते थे। इसके बाद आरोपी मशीन में जो पैसा फंसा होता था उसे निकाल लेते थे।

