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नोएडा: डेंगू मरीजों के लिए कारगर साबित हो रहीं होम्योपैथिक दवाएं

मानसून आते ही डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है। जहां एक ओर एलोपैथी में डेंगू का कोई निश्चित एंटी-वायरल इलाज नहीं है और मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर इलाज और प्लेटलेट्स की निगरानी की जाती है, वहीं दूसरी ओर होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति डेंगू के इलाज और रोकथाम में प्रभावी और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रही है।

चिकित्सकों के अनुसार, होम्योपैथिक दवाएं न केवल मरीजों के प्लेटलेट्स को तेजी से गिरने से रोकती हैं, बल्कि मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं। होम्योपैथिक के वरिष्ठ विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पद्धति में मरीज के शारीरिक और मानसिक लक्षणों को देखकर दवा का चयन किया जाता है। सेक्टर-24 स्थित डॉ. डीपीआर केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान की रिसर्च ऑफिसर डॉ. स्वाति पांडेय ने बताया कि यहां पर जो भी डेंगू के पॉजिटिव मरीज आते हैं, इनकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को दी जाती है। डेंगू पॉजिटिव मरीजों के साथ ही पोस्ट डेंगू मरीजों का भी इलाज किया जाता है। पॉजिटिव मरीजों में हर दूसरे-तीसरे दिन प्लेटलेट्स काउंट होता है। यदि डिजीज कंट्रोल होती है तो प्लेटलेट्स भी कंट्रोल हो जाती है। यदि 20 से 25 हजार प्लेटलेट्स होती है तो मरीज को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. प्रीति सिंघल ने बताया कि मरीज में प्लेटलेट्स कंट्रोल करना मुख्य होता है। होम्योपैथिक दवा से प्लेटलेट्स कम नहीं होती है और यदि कम हो गई हैं तो बढ़ने की संभावना अधिक होती है। यदि एलोपैथिक दवाई ले रहे हैं तो होम्योपैथिक दवाई भी साथ ले सकते हैं, इसके कोई साइडइफेक्ट्स नहीं रहते हैं। यदि संभव है तो 10 मिनट का अंतराल भी रख सकते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान

-बिना किसी होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न खाएं।

-बुखार होने पर तुरंत ब्लड टेस्ट करवाएं ताकि प्लेटलेट्स के स्तर का पता चल सके।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )