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वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि; घरेलू उपभोक्ताओं को 1 मई से राहत

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May 1, 2026 #source
Commercial LPG Prices Raised Sharply; Domestic Consumers Spared from Hike on May 1

वाणिज्यिक एलपीजी कीमतों में वृद्धि, घरेलू उपभोक्ता प्रभाव से बचे

सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 1 मई से भारी वृद्धि की घोषणा की है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस बार कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 993 रुपए की वृद्धि की गई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत 3,071.50 रुपए और मुंबई में 3,024 रुपए पर पहुंच गई है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ते दबाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते लिया गया है।

इस नई वृद्धि से रेस्टोरेंट, होटल, कैटरर्स, खाद्य विक्रेता और अन्य छोटे व्यवसाय जिन्हें दैनिक संचालन के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की आवश्यकता होती है, पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। भोजन सेवा क्षेत्र में रसोई गैस की लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, इसलिए कीमतों में यह वृद्धि व्यवसाय के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है और अंततः मेन्यू की कीमतों या सेवा शुल्क में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रखी गई है, जिससे उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय ईंधन मूल्य वृद्धि के प्रत्यक्ष प्रभाव से बचाया गया है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।

वहीं, 5 किलोग्राम के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 1 मई से 261 रुपए की वृद्धि हुई है। ये छोटे सिलेंडर, जिन्हें आमतौर पर “छोटू” सिलेंडर कहा जाता है, प्रवासी मजदूरों, बिना स्थानीय पते वाले उपभोक्ताओं, कम गैस जरूरत वाले लोगों और सीमित भंडारण वाले छोटे प्रतिष्ठानों के लिए पेश किए गए थे।

इस वर्ष वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अप्रैल में 196 रुपए, 7 मार्च को 114.5 रुपए और 1 मार्च को 28 रुपए की वृद्धि के बाद जनवरी से कुल मिलाकर वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 1,491 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो व्यवसायों के लिए लागत में एक बड़ा इजाफा है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने इस मूल्य संशोधन की पुष्टि की है और बताया है कि अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन संचालन हेतु बल्क डीजल और एविएशन टरबाइन ईंधन की कीमतें भी बढ़ाई गई हैं। हालांकि कुछ पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कटौती भी की गई है। इस टोल-मोल दृष्टिकोण के तहत तेल विपणन कंपनियां वैश्विक प्रवृत्तियों के अनुरूप कीमतें समायोजित कर रही हैं, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने का प्रयास भी जारी है।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)