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ग्रेटर नोएडा: कंपनी में काम करना है तो करनी होगी दोस्ती

इकोटेक-3 कोतवाली में एक युवती ने कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया है। आरोप है कि उस पर जबरन दोस्ती करने और टूर पर घूमने जाने का दबाव बनाया गया। उसके भाई को नौकरी से निकाल दिया गया। युवती ने कंपनी के अंदर गलत गतिविधियां चलाने का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि सुपरवाइजर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है।पीड़ित युवती बिसरख कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहती है। वो औद्योगिक सेक्टर इकोटेक-3 की मल्होत्रा इलेक्ट्रॉनिक्स में अप्रेंटिस करती है। उसके साथ भाई भी नौकरी करता था, लेकिन एक माह पहले उसके भाई को नौकरी से निकाल दिया गया। आरोप है कि लाइन हेड और सुपरवाइजर राजाराम उस पर जबरन कंपनी के एक अधिकारी से दोस्ती करने और टूर पर साथ जाने का दबाव बना रहे हैं। उसने इंकार कर दिया और घर जाकर परिजनों को जानकारी दी। जिस पर पिता ने कंपनी के एचआर ऑफिस में जाकर जीएम व अन्य से बात भी की। आरोप है कि वहां उन्होंने ऐसी लड़की को नौकरी पर रखने से इंकार कर दिया, जो कंपनी की बातें घर जाकर बताती है।

युवती का आरोप है कि कंपनी में लड़कियों के साथ गलत गतिविधियां होती हैं। यहां पहले लड़कियों की निजी जानकारी चोरी की जाती है। फिर उनसे उनके प्रेमी के बारे में पूछा जाता है। लड़कियों को वेतन के अलावा 4-5 हजार रुपये अतिरिक्त देने का ऑफर दिया गया था। ऑफर स्वीकार नहीं करने पर उसे कंपनी से निकाल दिया गया। युवती ने लाइन हेड और सुपरवाइजर पर इस काम के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस ने केवल सुपरवाइजर पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है।कोतवाली प्रभारी का कहना है कि युवती को किसी ने गलत तरीके से हाथ छू लिया था। इसका मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। वहां पर अन्य महिलाएं भी काम करती हैं। सीसीटीवी कैमरा लगे हैं। बाकी युवती के आरोपों की जांच की जा रही है

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}