महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद भी राजनीतिक सरगर्मी थमी नहीं है। अब नगर निगमों में मेयर पद को लेकर जोड़-तोड़ और रणनीति का दौर जारी है। हालात ऐसे हैं कि हर एक कॉरपोरेटर की भूमिका अहम हो गई है और पार्टी नेतृत्व उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए है।
कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना (यूबीटी) ने अपने चार निर्वाचित कॉरपोरेटरों के पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाकर सनसनी फैला दी है। ये चारों 16 जनवरी को चुनाव जीतने के बाद से कथित तौर पर गायब बताए जा रहे हैं। यूबीटी नेताओं का आरोप है कि ये जनप्रतिनिधि जनता का सामना करने से बच रहे हैं।
122 सीटों वाले कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में महायुति को बढ़त मिली है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने 52 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 51 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। शिवसेना (यूबीटी) को 11 सीटें मिलीं। इसके अलावा मनसे को 5, कांग्रेस को 2 और राकांपा (एसपी) को 1 सीट हासिल हुई।
बीएमसी में मेयर पद को लेकर बीजेपी से चल रही बातचीत के बीच शिंदे गुट ने कल्याण-डोंबिवली में मनसे का समर्थन हासिल कर लिया, जिससे उनके पार्षदों की संख्या 57 हो गई। हालांकि बहुमत के लिए 62 का आंकड़ा जरूरी है, यानी अभी भी पांच पार्षदों की कमी है। ऐसे में यूबीटी के चार कॉरपोरेटरों का गायब होना सियासी समीकरणों को और उलझा रहा है।
स्थिति तब और पेचीदा हो गई जब यूबीटी के 11 में से केवल 7 कॉरपोरेटरों ने उमेश बोरगांवकर के नेतृत्व में कोंकण आयुक्त कार्यालय में पार्टी की ओर से अपना पंजीकरण कराया। बाकी चार—मयूर म्हात्रे, कीर्ति ढोने, राहुल कोट और स्वप्नाली केने—अचानक संपर्क से बाहर हो गए। उनके मोबाइल फोन भी बंद बताए जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि कई प्रयासों के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो सका।
यूबीटी नेताओं को आशंका है कि ये कॉरपोरेटर शिंदे गुट के संपर्क में हो सकते हैं। इसी बीच, शुक्रवार को कल्याण जिला प्रमुख शरद शिवराज पाटिल ने कोलसेवाडी पुलिस स्टेशन में शिकायत देकर दो कॉरपोरेटरों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के विश्वास से जुड़ा है।
पाटिल ने आशंका जताई कि इस पूरे घटनाक्रम में दबाव, प्रलोभन या किसी आपराधिक साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं ने इन प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है, उनके प्रति जवाबदेही निभाना उनकी जिम्मेदारी है।
कॉरपोरेटरों के सामने न आने पर यूबीटी ने शहर में उनके पोस्टर लगाकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं और उनसे जनता के सामने आने की मांग की है। कल्याण-डोंबिवली की सियासत अब और भी गर्माती नजर आ रही है।