इसके बाद महिलाओं को आशा थी कि 14 जनवरी से पहले दिसंबर और जनवरी की दो किस्तें—1,500-1,500 रुपये—एक साथ उनके खातों में ट्रांसफर कर दी जाएंगी। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि फिलहाल अतिरिक्त 1,500 रुपये नहीं मिलेंगे।
दरअसल, महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में 15 जनवरी को मतदान होना है। चुनाव से ठीक पहले मकर संक्रांति के मौके पर 3,000 रुपये दिए जाने को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस कदम को आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया। इसके बाद राज्य चुनाव आयोग ने जनवरी महीने की किस्त को एडवांस में देने पर रोक लगा दी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की दो किस्तें एक साथ देने की तैयारी में थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे महिला मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश बताया। शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने मामले पर संज्ञान लिया और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी।
हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि लाडकी बहिण योजना एक निरंतर चलने वाली योजना है और ऐसी योजनाओं को आमतौर पर आचार संहिता के दौरान जारी रखा जा सकता है। इसके बावजूद आयोग ने निर्देश दिए कि दिसंबर की नियमित 1,500 रुपये की किस्त दी जा सकती है, लेकिन जनवरी की किस्त को समय से पहले जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही, न तो नए लाभार्थियों को जोड़ा जाएगा और न ही कोई अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा।
इस बीच, सरकार की ओर से कहा गया है कि योजना पर कोई रोक नहीं है और पात्र महिलाओं को उनका हक मिलता रहेगा। वहीं विपक्ष ने साफ किया कि वह योजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि चुनावी नियमों के पालन की बात कर रहा है।
गौरतलब है कि इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। राज्य में करीब 2.4 करोड़ महिलाएं इसका लाभ ले रही हैं, जिससे हर महीने सरकारी खजाने पर लगभग 3,700 करोड़ रुपये का खर्च आता है।

