प्रयागराज के संगम तट पर चल रहे माघ मेले में इस बार साधु-संतों की तपस्या के साथ-साथ एक ऐसे बाबा भी सुर्खियों में हैं, जिनका अंदाज लोगों को हैरान कर रहा है। काला चश्मा, लग्जरी काफिला और करोड़ों की कारों में नजर आने वाले ये बाबा हैं सतुआ बाबा, जिन्हें संतोष दास के नाम से भी जाना जाता है। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं—कभी करीब 3 करोड़ रुपये की पोर्शे कार की पूजा करते दिखते हैं तो कभी प्राइवेट जेट में सफर करते हुए।
उनके शाही ठाठ-बाट को लेकर सवाल भी उठे कि क्या संन्यासी जीवन ऐसा होना चाहिए? इस पर सतुआ बाबा का जवाब भी उतना ही तीखा रहा। उन्होंने कहा कि “सनातन की रफ्तार रोकने वालों को इन्हीं गाड़ियों की रफ्तार से जवाब दिया जाएगा।” हाल ही में लैंड रोवर डिफेंडर के बाद पोर्शे कार को अपने काफिले में शामिल कर माघ मेले के शिविर में विधिविधान से पूजा करवाई गई। आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए बाबा ने यहां तक कहा कि जो लोग बाबाओं की गाड़ियों से जलते हैं, वे सनातन विरोधी हैं।
सतुआ बाबा की राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ को लेकर भी चर्चाएं होती रहती हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी संतों में गिना जाता है। जब सीएम योगी ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी, उस दौरान सतुआ बाबा भी उनके साथ मौजूद थे। दिसंबर 2025 में प्रयागराज के तत्कालीन डीएम मनीष कुमार वर्मा का बाबा के आश्रम में चूल्हे पर रोटियां सेकते हुए वीडियो वायरल हुआ था, जिसने सियासी हलकों में काफी हलचल मचा दी थी।
दरअसल, सतुआ बाबा का असली नाम संतोष तिवारी है। वे विष्णु स्वामी संप्रदाय की पीठ के मुखिया हैं, जिन्हें परंपरागत रूप से सतुआ बाबा कहा जाता है। इस संप्रदाय की नींव 18वीं शताब्दी में महंत रणछोड़ दास जी ने काशी के मणिकर्णिका घाट पर रखी थी। संतोष दास इस परंपरा के 97वें आचार्य हैं।
ललितपुर में जन्मे संतोष तिवारी ने महज 11 साल की उम्र में गृह त्याग कर संन्यास ले लिया था। वर्ष 2012 में छठे पीठाधीश्वर यमुनाचार्य जी महाराज के निधन के बाद उन्होंने गद्दी संभाली। उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और महाकुंभ 2025 में उन्हें ‘जगद्गुरु’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।
आज काशी से लेकर प्रयागराज तक प्रशासन और सत्ता के गलियारों में उनकी पकड़ मानी जाती है। माघ मेला 2026 में उन्हें सबसे बड़ा और सुविधाओं से लैस पंडाल मिला है। सतुआ बाबा का मानना है कि सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार भव्यता और आधुनिकता के साथ होना चाहिए। वे अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास और सांस्कृतिक विजन का समर्थन करते नजर आते हैं और मुरारी बापू की राम कथाओं में भी सक्रिय रूप से शामिल होते रहे हैं।