• Sun. Jan 18th, 2026

UP: अस्तित्व की चुनौती के बीच भी आक्रामक रुख, मायावती ने कार्यकर्ताओं में फूंका जोश, संकल्प दोहराया

भले ही बहुजन समाज पार्टी इन दिनों अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रही हो, लेकिन पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नया उत्साह भरने की कोशिश की। उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के सम्मान के लिए आजीवन संघर्ष का दावा करते हुए कहा कि जब तक वह जीवित हैं, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

मायावती ने अपनी सेहत को दुरुस्त बताते हुए और बसपा संस्थापक कांशीराम की एकमात्र राजनीतिक उत्तराधिकारी होने की बात दोहराकर यह संकेत दिया कि पार्टी को कमजोर करने की किसी भी साजिश का वह डटकर सामना कर सकती हैं। उन्होंने न सिर्फ विरोधी दलों पर निशाना साधा, बल्कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर गुटबाजी करने वाले कुछ नेताओं को भी सख्त संदेश दिया कि बसपा की कमान पूरी तरह उनके हाथों में सुरक्षित है। उनका कहना था कि वह न तो झुकेंगी और न ही किसी दबाव या लालच में पार्टी के आंदोलन से पीछे हटेंगी।

अपने संबोधन में मायावती ने पारंपरिक दलित वोट बैंक के साथ-साथ उन जातियों का भी जिक्र किया जो हाल के दिनों में सियासी बहस का हिस्सा बनी हुई हैं। उन्होंने बसपा के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले की याद दिलाई, जिसने अतीत में पार्टी को चुनावी सफलता दिलाई थी। उनके भाषण में ‘आयरन लेडी’ वाली छवि साफ दिखाई दी, जिसने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम किया।

मायावती ने समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले पर हमला करते हुए कहा कि सपा शासन में पिछड़ों के आरक्षण का लाभ भी सीमित वर्ग तक सिमट कर रह गया, जबकि मुस्लिम समाज उपेक्षित ही रहा। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज का समर्थन पहले से अधिक बसपा को मिलेगा और सपा का पीडीए सिर्फ देखता रह जाएगा। इस रणनीति का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में दिखेगा।

वर्तमान में बसपा कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना कर रही है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में है और राज्यसभा में भी इस बार उसकी मौजूदगी नहीं होगी। विधानसभा में पार्टी का सिर्फ एक विधायक उमाशंकर सिंह है। इन हालात में बसपा अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। हालांकि, अन्य राज्यों के निकाय चुनावों में पार्टी को कुछ सफलता मिली है और प्रदेश में जनाधार बढ़ाने के प्रयास भी किए गए हैं। इसी कड़ी में मायावती ने कई राज्यों में प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों में बदलाव कर संगठन को मजबूत करने का संकेत दिया है।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *