इस संबंध में म्युनिसिपल कमिश्नर राधाबिनोद शर्मा और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर के विकास से जुड़े कुल 25 अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें ट्रैफिक जाम, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाएं शामिल रहीं।
समीक्षा बैठक में चेना नदी वॉटरफ्रंट रोड, शिवश्रुति मार्ग, खाड़ी किनारा विकास परियोजना, नई म्युनिसिपल बिल्डिंग, जरीमरी झील में प्रस्तावित 51 फुट की विट्ठल मूर्ति, क्लस्टर योजना, स्वास्थ्य सेवाएं और नगर निगम सेवाओं में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों को शामिल करने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ‘उमेद’ मॉल का प्रस्ताव
बैठक में कमिश्नर को निर्देश दिए गए कि केंद्र और राज्य सरकार से मिले 50 करोड़ रुपये के फंड से महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए एक बड़ा ‘उमेद’ मॉल विकसित किया जाए। इसके अलावा, महिलाओं के लिए हॉस्टल निर्माण हेतु भी 50 करोड़ रुपये का फंड राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा, जिसके लिए जल्द स्थान तय किया जाएगा।
2300 करोड़ रुपये पहले ही मंजूर, अब 1200 करोड़ का अतिरिक्त फंड
डिप्टी मुख्यमंत्री Eknath Shinde ने मीरा-भायंदर शहर के विकास कार्यों के लिए 1400 करोड़ रुपये और सड़क मरम्मत के लिए 900 करोड़ रुपये, यानी कुल 2300 करोड़ रुपये पहले ही मंजूर कर दिए हैं। इसके अलावा, चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले सड़क कंक्रीटीकरण के लिए 1200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड भी स्वीकृत किया गया है, जिसके लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।
इस फंड के जरिए शहर की सड़कों को सीमेंट कंक्रीट से मजबूत किया जाएगा। मंत्री प्रताप सरनाईक ने दावा किया कि अगले डेढ़ से दो साल में मीरा-भायंदर को गड्ढा-मुक्त शहर बनाया जाएगा। साथ ही, पूरे शहर में BOT आधार पर फ्री वाई-फाई सुविधा देने की योजना है, जिसके लिए अगले 2–3 महीनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि नगर निगम के कामकाज में तेजी लाने के लिए हर महीने कमिश्नर स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।

