संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार से मराठी नियम लागू करने में देरी की मांग की
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के प्रस्ताव को छह महीने से एक वर्ष तक के लिए स्थगित करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस नियम को लागू करने में पर्याप्त समय देना आवश्यक है ताकि चालकों को भाषा सीखने का मौका मिल सके।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने पहले घोषणा की थी कि 1 मई से सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य होगा। इसके तहत राज्यभर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों द्वारा निरीक्षण होगा, जिसमें चालकों की पढ़ने-लिखने की क्षमता की जांच की जाएगी। नियमों का पालन न करने पर चालकों के लाइसेंस रद्द किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
इस फैसले के खिलाफ चालकों के संघों में असंतोष व्याप्त है और कई संघों ने 4 मई से राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
निरुपम ने मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि मराठी भाषा महाराष्ट्र की पहचान और गर्व का प्रतीक जरूर है, लेकिन किसी भाषा को सीखने में समय लगता है और यह व्यक्ति की योग्यता पर निर्भर करता है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि चालकों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए, न कि नियम को तुरंत लागू किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश ड्राइवर भाषा सीखने के इच्छुक हैं, लेकिन उन्हें आत्मविश्वास के साथ सीखने के लिए कुछ समय चाहिए। निरुपम ने एक लचीले दृष्टिकोण की भी सिफारिश की है, जिसमें बेसिक या कामकाजी मराठी बोलने वालों के लिए छूट दी जाए।
मुंबई की विविध जनसंख्या का उल्लेख करते हुए निरुपम ने कहा कि यहां काम करने वाले कई चालक विभिन्न राज्यों से आते हैं और यह काम उनकी आजीविका का साधन है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियम का अचानक लागू होना इन चालकों में भय और असंतोष पैदा कर सकता है, जिससे शहर के परिवहन तंत्र में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से हल किया जाना चाहिए और भाषा को कड़ाई से थोपने के बजाय स्वीकार्यता के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।