एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप धुप्पर ने बताया कि नोएडा क्षेत्र के अनेक ट्रांसपोर्टर्स और व्यवसायियों ने अपने कारोबार के विस्तार के लिए नोबल को-ऑपरेटिव बैंक से ऋण लिया था। आरोप है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद बैंक द्वारा ऋणधारकों को जानबूझकर परेशान किया जाता है। यहां तक कि ब्याज सहित पूरा ऋण चुकाने के बावजूद उन्हें एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं दी जाती। इसके बजाय अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाकर गिरवी रखी गई संपत्तियों को हड़पने का प्रयास किया जाता है।
एसोसिएशन के महासचिव अनिल दीक्षित ने आरोप लगाया कि बैंक के पदाधिकारी विजय कुमार शर्मा, राघव भारद्वाज, गोविन्द भारद्वाज और प्रतीक यादव आपसी मिलीभगत से एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें यह कहकर धमकाया जाता है कि पुलिस और प्रशासन उनके प्रभाव में है और चाहे कितनी भी एफआईआर दर्ज करा ली जाए, कोई कार्रवाई नहीं होगी।
पदाधिकारियों ने बताया कि बैंक प्रबंधन के खिलाफ कई मामलों में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रभावशाली संपर्कों और ऊंची पहुंच के कारण पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है, जिससे अधिकांश लोग डर और दबाव में चुप रहने को मजबूर हैं। उन्होंने जानकारी दी कि नोबल को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ 24/05/2024 को पंकज चौहान, 29/07/2025 को कालू सिंह चौहान, 07/11/2025 को सतपाल यादव और 12/11/2025 को राहुल द्वारा मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। प्रेसवार्ता के दौरान सभी पीड़ितों ने अपनी-अपनी आपबीती भी साझा की।
नोएडा बस एसोसिएशन ने प्रशासन, पुलिस विभाग और संबंधित नियामक संस्थाओं से मांग की है कि नोबल को-ऑपरेटिव बैंक की समस्त गतिविधियों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए

