टाज महल को हिंदू मंदिर बताने वाले प्रसारण में निष्पक्षता की कमी, आज तक को संपादन करने का निर्देश
न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने पत्रकार सुदीप चौधरी द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम के कुछ हिस्सों को संपादित या उपयुक्त रूप से संशोधित करने का निर्देश दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि ताज महल पहले एक हिंदू मंदिर था। यह जानकारी शनिवार को Bar and Bench ने दी।
अथॉरिटी ने पाया कि यह प्रसारण अपने आचार संहिता के तहत निष्पक्षता एवं तटस्थता मानकों पर खरा नहीं उतरा।
गुरुवार को जारी आदेश में, अध्यक्ष जस्टिस ए के सिकरी ने उल्लेख किया कि ‘‘जब प्रसारक ने कुलकता मिनार से संबंधित दावों को कवर करते हुए पुरातत्व सर्वेक्षण भारत की रिपोर्ट पर भरोसा किया, तो ताज महल से जुड़े मामलों में समान आधिकारिक अभिलेखों को नजरअंदाज किया गया।’’
यह आदेश उस आवेदन पर जारी किया गया था, जिसने NBDSA के दिसंबर के फैसले को चुनौती दी थी, जिसने उस कार्यक्रम में आचार संहिता का उल्लंघन नहीं पाया था।
याचिका में कहा गया था कि 29 नवंबर 2024 को प्रसारित “ब्लैक एंड व्हाइट” के एपिसोड ने मुस्लिम शासकों द्वारा हिंदू मंदिरों के विनाश के बारे में एक तरफा दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि यह प्रसारण ताज महल को मूलतः हिंदू मंदिर बताने के बहुचर्चित, परन्तु वैज्ञानिक दृष्टि से अमान्य दावे को बढ़ावा देता है, जबकि पुरातत्व सर्वेक्षण भारत ने ऐसी किसी भी बात को खारिज किया है।
टेलीविजन टुडे नेटवर्क लिमिटेड, जो आज तक का स्वामी है, ने इस प्रसारण का बचाव किया।
यह मामला मीडिया में संवेदनशील ऐतिहासिक कथाओं के प्रसारण पर निष्पक्षता और तथ्यात्मकता के मानदंडों की जरूरत को उजागर करता है। NBDSA का यह निर्णय जनसमूह में सूचना की विश्वसनीयता और संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।
भविष्य में मीडिया संस्थानों से उम्मीद की जाती है कि वे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करेंगे, जिससे सामाजिक सौहार्द और संतुलन स्थापित हो सके।