• Thu. May 28th, 2026
विपक्ष ने एसआईआर पर सरकार का किया घेराव

एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष का सशक्त सवाल: सरकार पर अनियमितताओं का आरोप

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मतदाता सूची में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) संबंधी फैसले के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की आलोचना तेज कर दी है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है और चुनाव की साख पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

विपक्षी नेताओं ने यह भी चिंता जताई है कि यदि हटाए गए मतदाता अपने अपीलों में सफल होकर पुनः मतदान का अधिकार पाते हैं, तो उन चुनावों की वैधता को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा जो पहले ही संपन्न हो चुके हैं। ये सवाल तब गूंजे जब सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के मतदान सूची संशोधन के अधिकार को बरकरार रखा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया चुनाव आयोग की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के अंतर्गत आती है तथा इसका मूल उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना है। किन्तु कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस प्रक्रिया में हुई देरी और दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “फॉर्म 7 के दुरुपयोग से कई मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जबकि अपीलों पर फैसला आने से पहले ही चुनाव संपन्न हो गए।”

मसूद ने सवाल उठाया कि यदि अपीलों के बाद हटाए गए मतदाताओं को मतदान का अधिकार वापस मिलता है, तो आने वाले चुनावों की वैधता पर प्रश्नचिन्ह नहीं आएगा? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध भी किया कि फर्जी फॉर्म 7 के उपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

साथ ही उन्होंने कहा कि फॉर्म 7 में समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए ताकि इससे चुनावी सूचियों पर गलत प्रभाव न पड़े। उन्होंने यूपी की चुनावी तैयारियों का हवाला देते हुए कहा कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है, परन्तु फॉर्म 7 की तैयारी अभी भी चल रही है जो चुनावों के तुरंत पहले जमा की जाएगी, जिससे लोकतंत्र की रक्षा पर प्रश्न उठता है।

कांग्रेस के अलावा, कन्हैया कुमार ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का उचित जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं, सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से पूछा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके साथ सरकार क्या कदम उठाएगी। क्या उन्हें जेल में डाला जाएगा या जिस देश से वे आए थे वहां वापस भेज दिया जाएगा? यादव ने चुनाव आयोग पर विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में मतदाता सूचियों में गरीबों के नाम हटाने का आरोप भी लगाया।

यादव ने यह भी कहा कि यदि चुनाव के बाद हटाए गए मतदाता पुनः मतदान का अधिकार पाते हैं, तो क्या ऐसे चुनावों को अमान्य घोषित किया जाएगा। उन्होंने माना कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की कानूनी वैधता को स्वीकार किया है, परन्तु भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा इस प्रक्रिया का राजनीतिक लाभ उठाने की आशंका बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी एसआईआर में अनियमितताओं के संकेत दिए और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि बंगाल में इस प्रक्रिया के खिलाफ मजबूत दलीलें प्रस्तुत की गई हैं। वे यह मानते हैं कि बावजूद सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट के, एसआईआर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं।

Source

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)