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नोएडा: 39 डेवलपर्स को भूमाफिया घोषित करने की तैयारी शुरू कर दी है

नोएडा प्राधिकरण ने सलारपुर पुलिस चौकी के पीछे की अधिग्रहित भूमि पर बसाई गई अवैध सोसायटियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 39 डेवलपर्स को भूमाफिया घोषित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
इन सभी पर प्राधिकरण की जमीन पर अवैध निर्माण कर जनता को गुमराह करने का आरोप है। आम लोगों से अपील की गई है कि वे इन सोसायटियों में किसी भी प्रकार की प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त न करें, अन्यथा उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

62 से अधिक अवैध सोसायटियों की पहचान

25 खसरा नंबरों पर कब्जानोएडा प्राधिकरण ने सलारपुर पुलिस चौकी के पीछे की अधिसूचित और अधिग्रहित भूमि पर 62 से अधिक अवैध रिहायशी सोसायटियों की पहचान की है। ये निर्माण कार्य 25 अलग-अलग खसरा नंबरों पर किए जा रहे हैं, जो कि प्राधिकरण की संपत्ति हैं। इन कॉलोनियों का निर्माण वर्ष 2018 से लगातार चल रहा है।प्राधिकरण ने 15 जुलाई को इन सभी निर्माणों को अवैध घोषित करते हुए मौके पर नोटिस चिपका दिया था। 39 डेवलपर्स को चेतावनी दी गई थी कि वे सात दिन के भीतर स्वयं निर्माण गिरा दें, अन्यथा प्रशासन खुद कार्रवाई करेगा और उसका खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। बावजूद इसके, किसी भी डेवलपर ने नोटिस का पालन नहीं किया, जिससे अब उन्हें भूमाफिया घोषित करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है।

जिलाधिकारी से बैठक के बाद एक्शन मोड में आया प्राधिकरण

सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डॉ. लोकेश एम ने नवनियुक्त जिलाधिकारी के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की। सीईओ ने भूलेख विभाग को आदेश दिया है कि प्रत्येक डेवलपर की खसरा वाइज फाइल तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाए, ताकि उन्हें जल्द भूमाफिया घोषित किया जा सके।

गौरतलब है कि कई अवैध निर्माण महर्षि आश्रम की जमीन पर भी किए जा रहे हैं, जहां बिना किसी अनुमति या मानचित्र स्वीकृति के इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन निर्माणों में मिलीभगत से किसानों द्वारा जमीन को गलत तरीके से अपने नाम दाखिल-खारिज भी कराया गया है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}