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मुंबई में श्वसन संबंधी जोखिम बढ़े; विशेषज्ञों ने शीघ्र निदान और कड़े कदम उठाने का आह्वान किया

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May 6, 2026 #source
Mumbai Sees Rising Respiratory Risks; Experts Urge Early Diagnosis and Stronger Action

मुंबई में बढ़ते श्वसन रोग: जागरूकता और समय पर इलाज जरूरी

विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर, प्रमुख श्वसन विशेषज्ञों ने मुंबई में अस्थमा एवं अन्य पुरानी श्वसन बीमारियों के बढ़ते बोझ पर चिंता व्यक्त की और ज्यादा जागरूकता, शीघ्र निदान एवं निरंतर रोकथाम के उपाय अपनाने का आह्वान किया।

मुंबई में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण, निर्माण कार्यों की धूल एवं बदलते मौसम के कारण वायु प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है, जिससे सभी आयु वर्ग में श्वसन संबंधी रोगों में वृद्धि देखी जा रही है। प्रदूषित वायु अस्थमा के लिए एक प्रमुख ट्रिगर के रूप में काम करती है, जो सांस फूलना, घरघराहट, छाती में कसाव और लगातार खांसी जैसे लक्षणों को खराब करता है।

डॉ. संगीता चेकर, सलाहकार पल्मोनोलॉजिस्ट, वॉकहार्ट अस्पताल, मीरा रोड ने बताया, “शहरी क्षेत्रों में जैसे मुंबई, अस्थमा के केस बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण प्रदूषण और जीवनशैली है। चिंता का विषय यह है कि कई मरीज समय पर चिकित्सा सहायता नहीं लेते और शुरुआती चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करते हैं। अस्थमा का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन सही उपचार, नियमित निगरानी एवं ट्रिगर्स से बचाव के साथ इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप गंभीर हमलों और जटिलताओं को रोकने में महत्वपूर्ण हैं।”

डॉ. पार्थिव शाह, चेस्ट फिजिशियन, एपेक्स ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर कहा, “हमें केवल ‘इलाज’ से हट कर ‘पूर्वानुमान’ की दिशा में सोच बदलनी होगी। अस्थमा अचानक खराब नहीं होता – यह धीमे-धीमे चेतावनी संकेत देता है जैसे कि नींद में खलल, सहनशक्ति में कमी, या गले में बार-बार जलन, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आज के प्रदूषित और तेज़ जीवनशैली वाले शहरों में ये प्रारंभिक लक्षण अधिक आम हो रहे हैं, यहां तक कि युवा और स्वस्थ व्यक्तियों में भी। अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन तब ही जब मरीज, परिवार और समाज समय रहते सतर्क हो और क्राइसिस से पहले कदम उठाए। रोकथाम अब वैकल्पिक नहीं रह गई—यह सबसे प्रभावी उपचार है।”

विशेषज्ञों ने जोर दिया कि उच्च प्रदूषण वाले इलाकों में मास्क पहनना, घर के अंदर वायु गुणवत्ता बनाए रखना, डॉक्टर के निर्देशानुसार इनहेलर का उपयोग करना और नियमित जांच कराना अस्थमा संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है। बच्चों और वृद्धों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है क्योंकि वे पर्यावरणीय ट्रिगर्स के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

इस विश्व अस्थमा दिवस पर सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपनी श्वसन स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, शुरुआती लक्षणों को पहचानें और समय पर चिकित्सा सलाह लें। प्रदूषण नियंत्रण और श्वसन रोगों के बोझ को कम करने के लिए व्यक्तिगत से लेकर नीति निर्माताओं तक सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

आम लक्षण जो लोग अनुभव करते हैं:

  • सांस लेने में कठिनाई
  • घरघराहट (साँस लेने पर सीटी जैसी आवाज़)
  • छाती में कसाव
  • बार-बार खाँसी, विशेषकर रात या सुबह के समय

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)